11 शीर्ष योगासन जो साइटिका के दर्द में राहत देने में मदद कर सकते हैं
साइटिका एक ऐसी समस्या है जिसमें कमर से निकलने वाली नस पर दबाव या जलन के कारण दर्द कमर से नितंब, जांघ, पैर और कभी-कभी पंजे तक महसूस हो सकता है। इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन या पैर में कमजोरी भी हो सकती है। लंबे समय तक बैठना, गलत मुद्रा, रीढ़ की कुछ समस्याएं और नस पर दबाव इसके संभावित कारणों में शामिल हैं।
हल्के और नियंत्रित योगासन शरीर को सक्रिय रखने, मांसपेशियों में लचीलापन बनाए रखने और कमर तथा पैरों की जकड़न कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, साइटिका में हर व्यक्ति के लिए एक ही व्यायाम सही नहीं होता। इसलिए ऐसे आसन चुनना जरूरी है जो आपकी स्थिति के अनुसार आरामदायक हों और दर्द को बढ़ाएं नहीं।
महत्वपूर्ण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। यदि दर्द बहुत तेज है, लगातार बढ़ रहा है, पैर में कमजोरी या अधिक सुन्नपन है, या पेशाब/मल पर नियंत्रण में बदलाव है, तो योग करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
साइटिका में योग क्यों उपयोगी हो सकता है?
साइटिका के दौरान पूरी तरह निष्क्रिय रहने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे गतिविधि जारी रखना अक्सर उपयोगी होता है। हल्की गतिविधि शरीर की गतिशीलता बनाए रखने और मांसपेशियों की जकड़न कम करने में सहायता कर सकती है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने के बजाय समय-समय पर उठकर चलना भी फायदेमंद हो सकता है।
योग के कुछ सरल आसन:
- कमर की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
- पैरों और नितंबों की जकड़न कम करने में सहायता कर सकते हैं।
- शरीर की मुद्रा और संतुलन पर काम कर सकते हैं।
- तनाव और शरीर में अनावश्यक खिंचाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
- नियमित, नियंत्रित गतिविधि की आदत विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
ध्यान रखें कि योग साइटिका के मूल कारण का इलाज होने की गारंटी नहीं देता। इसका उद्देश्य शरीर को सुरक्षित तरीके से सक्रिय और गतिशील रखने में सहायता करना है।
साइटिका के लिए 11 शीर्ष योगासन
1. मकरासन
मकरासन एक आरामदायक विश्राम मुद्रा है, जिसमें शरीर को पेट के बल रखकर कमर और शरीर को आराम दिया जाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें अभ्यास के बीच आराम की आवश्यकता होती है।

करने का तरीका
- पेट के बल योग मैट पर लेट जाएं।
- पैरों को आराम से पीछे की ओर सीधा रखें।
- दोनों हाथों को मोड़कर उनके ऊपर माथा या सिर आराम से रखें।
- कंधों और कमर को ढीला छोड़ें।
- धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें।
- कुछ समय इसी स्थिति में आराम करें।
सावधानी
यदि पेट के बल लेटने से कमर या पैर का दर्द बढ़ता है, तो इस मुद्रा को न करें।
2. बालासन
बालासन शरीर को आराम देने वाला सरल आसन है। इसमें कमर, पीठ और पैरों के आसपास के हिस्से में हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है।

करने का तरीका
- घुटनों के बल बैठें।
- पैरों के पंजों को पीछे की ओर रखें।
- धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
- माथे को मैट पर रखें।
- हाथों को सामने की ओर फैलाएं या शरीर के पास आराम से रखें।
- सामान्य गति से सांस लेते रहें।
- कुछ सेकंड रुककर धीरे-धीरे वापस आएं।
लाभ
- शरीर को आराम देने में मदद।
- पीठ में हल्का खिंचाव।
- तनाव कम करने में सहायता।
- योग अभ्यास के बीच विश्राम के लिए उपयोगी।
सावधानी
यदि आगे झुकने से पैर में दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन बढ़ता है, तो इसे रोक दें।
3. मार्जरी आसन
मार्जरी आसन रीढ़ की हल्की गतिशीलता के लिए उपयोग किया जाता है। इसे बहुत धीरे और नियंत्रित तरीके से करना चाहिए।

करने का तरीका
- हाथों और घुटनों के बल आ जाएं।
- हथेलियां कंधों के नीचे रखें।
- घुटने शरीर के नीचे और लगभग कूल्हों की चौड़ाई पर रखें।
- सांस लेते हुए रीढ़ को आराम से सीधा रखें।
- सांस छोड़ते हुए पीठ को धीरे-धीरे गोल करें।
- फिर आराम से प्रारंभिक स्थिति में लौटें।
- गति बहुत धीमी रखें।
लाभ
यह रीढ़ की हल्की गतिशीलता बनाए रखने और पीठ की जकड़न कम करने में सहायता कर सकता है।
4. बिटिलासन
बिटिलासन को अक्सर मार्जरी आसन के साथ किया जाता है। दोनों मुद्राओं के बीच धीरे-धीरे जाने से रीढ़ को नियंत्रित तरीके से हिलाया जा सकता है।

करने का तरीका
- चारों अंगों के सहारे वाली स्थिति में आएं।
- हथेलियां कंधों के नीचे रखें।
- सांस लेते हुए छाती को थोड़ा आगे और ऊपर उठाएं।
- पेट को आराम से नीचे आने दें।
- गर्दन को पीछे ज्यादा न खींचें।
- सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें।
ध्यान रखने वाली बात
यह कोई तेज गति वाला व्यायाम नहीं है। यदि किसी दिशा में जाने पर साइटिका का दर्द पैर में अधिक नीचे की ओर फैलने लगे, तो उस गति को रोक दें।
5. सुप्त पवनमुक्तासन
सुप्त पवनमुक्तासन में पीठ के बल लेटकर एक या दोनों घुटनों को शरीर की ओर लाया जाता है। यह कमर और नितंबों के आसपास हल्का खिंचाव दे सकता है।

करने का तरीका
- पीठ के बल लेट जाएं।
- दोनों घुटनों को मोड़ें।
- एक घुटने को धीरे-धीरे छाती की ओर लाएं।
- हाथों से घुटने या पैर को आराम से पकड़ें।
- जोर न लगाएं।
- कुछ सेकंड आराम से सांस लेते रहें।
- पैर वापस नीचे रखें और दूसरी तरफ दोहराएं।
लाभ
- निचली पीठ में हल्की गतिशीलता।
- नितंबों के आसपास खिंचाव।
- शरीर को आराम देने में सहायता।
यदि घुटने को छाती की ओर लाने से पैर का दर्द बढ़ता है, तो इसे छोड़ दें।
6. सेतु बंधासन
सेतु बंधासन में शरीर को पीठ के बल रखते हुए श्रोणि को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है। यह शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद कर सकता है।

करने का तरीका
- पीठ के बल लेटें।
- घुटनों को मोड़कर पैरों को जमीन पर रखें।
- पैर लगभग कूल्हों की चौड़ाई पर रखें।
- हाथ शरीर के दोनों ओर रखें।
- सांस लेते हुए श्रोणि को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
- कंधों और पैरों पर शरीर का भार संतुलित रखें।
- कुछ सेकंड रुकें।
- धीरे-धीरे नीचे आएं।
सावधानी
कमर को अत्यधिक ऊपर उठाने या जोर लगाने से बचें। यदि दर्द बढ़े तो अभ्यास रोक दें।
7. सुप्त मत्स्येंद्रासन
यह एक हल्का रीढ़ मोड़ने वाला आसन है। साइटिका में इसे बहुत सीमित और आरामदायक सीमा में करना चाहिए।

करने का तरीका
- पीठ के बल लेटें।
- घुटनों को मोड़ें।
- दोनों घुटनों को धीरे-धीरे एक तरफ ले जाएं।
- कंधों को जमीन पर आराम से रखें।
- सिर को आरामदायक स्थिति में रखें।
- कुछ सांसों तक रुकें।
- फिर घुटनों को बीच में लाकर दूसरी तरफ दोहराएं।
लाभ
- रीढ़ की हल्की गतिशीलता।
- कमर के आसपास जकड़न कम करने में सहायता।
- शरीर को आराम देने में मदद।
सावधानी
गहरी ट्विस्टिंग न करें। यदि पैर में दर्द या झनझनाहट बढ़ती है, तो आसन बंद कर दें।
8. सुप्त कपोतासन का सरल रूप
कपोतासन के कुछ रूप साइटिका के दौरान बहुत तीव्र हो सकते हैं, इसलिए शुरुआत में इसका सरल सुप्त रूप अधिक आरामदायक हो सकता है।

करने का तरीका
- पीठ के बल लेट जाएं।
- दोनों घुटनों को मोड़ें।
- एक पैर का टखना दूसरे पैर के घुटने के ऊपर रखें।
- नीचे वाले पैर को धीरे-धीरे अपनी ओर लाएं।
- नितंब के आसपास हल्का खिंचाव महसूस करें।
- कुछ सेकंड आराम से सांस लें।
- धीरे-धीरे पैर वापस रखें।
- दूसरी तरफ दोहराएं।
लाभ
यह नितंब और आसपास की मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाने में मदद कर सकता है।
सावधानी
खींचाव और तेज नसों वाले दर्द में अंतर समझना जरूरी है। यदि बिजली के झटके जैसा दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन बढ़े, तो अभ्यास रोक दें।
9. अधोमुख श्वानासन का हल्का रूप
अधोमुख श्वानासन एक लोकप्रिय योग मुद्रा है, लेकिन साइटिका वाले व्यक्ति के लिए इसका पूरा रूप हमेशा आरामदायक नहीं होता। इसलिए शुरुआत में इसे बहुत हल्के रूप में करना बेहतर हो सकता है।

करने का तरीका
- हाथों और घुटनों के बल आएं।
- हथेलियां जमीन पर मजबूती से रखें।
- धीरे-धीरे श्रोणि को पीछे और ऊपर उठाएं।
- घुटनों को आवश्यकता के अनुसार थोड़ा मोड़ा रखें।
- रीढ़ को लंबा रखने की कोशिश करें।
- शरीर पर अत्यधिक भार न डालें।
- कुछ सांसों के बाद धीरे-धीरे वापस आएं।
सावधानी
यदि इस मुद्रा में पैर के पीछे दर्द या झनझनाहट स्पष्ट रूप से बढ़ती है, तो इसे न करें। साइटिका में हैमस्ट्रिंग को बहुत जोर से खींचना कुछ लोगों में लक्षण बढ़ा सकता है।
10. ताड़ासन
ताड़ासन देखने में बहुत सरल है, लेकिन सही खड़े होने की आदत और शरीर के संतुलन पर ध्यान देने के लिए उपयोगी हो सकता है।

करने का तरीका
- सीधे खड़े हो जाएं।
- दोनों पैरों के बीच आरामदायक दूरी रखें।
- वजन दोनों पैरों पर समान रूप से रखें।
- घुटनों को लॉक न करें।
- रीढ़ को लंबा रखें।
- कंधों को ढीला रखें।
- सिर को शरीर के ऊपर संतुलित रखें।
- सामान्य रूप से सांस लें।
लाभ
- खड़े होने की मुद्रा पर ध्यान देने में मदद।
- शरीर का संतुलन सुधारने में सहायता।
- लंबे समय तक गलत मुद्रा में रहने की आदत कम करने में उपयोगी।
11. सुप्त पादांगुष्ठासन का सरल रूप
इस आसन में पैर को ऊपर उठाया जाता है, लेकिन साइटिका के दौरान पैर को बहुत अधिक खींचना उचित नहीं है। इसलिए इसका हल्का रूप अपनाएं।

करने का तरीका
- पीठ के बल लेटें।
- एक घुटने को मोड़कर रखें।
- दूसरे पैर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
- पैर को केवल उतना ही ऊपर उठाएं जितना आरामदायक हो।
- घुटने को पूरी तरह लॉक करने की जरूरत नहीं है।
- कुछ सेकंड रुकें।
- पैर नीचे लाकर दूसरी तरफ दोहराएं।
सावधानी
पैर के पीछे हल्का खिंचाव और नसों से जुड़ा तेज दर्द अलग-अलग अनुभव हो सकते हैं। यदि पैर में जलन, झनझनाहट या शूटिंग पेन बढ़ने लगे, तो तुरंत रुकें।
साइटिका के लिए सरल योग रूटीन
यदि आपकी स्थिति हल्की है और ऊपर दिए गए आसन आरामदायक लगते हैं, तो शुरुआत में एक छोटा रूटीन अपनाया जा सकता है:
- मकरासन – 1 से 2 मिनट
- मार्जरी-बिटिलासन – 5 से 8 धीमे चक्र
- बालासन – 20 से 30 सेकंड
- सुप्त पवनमुक्तासन – प्रत्येक पैर के लिए कुछ आरामदायक दोहराव
- सुप्त कपोतासन का सरल रूप – प्रत्येक तरफ 15 से 30 सेकंड
- सेतु बंधासन – 5 से 8 आरामदायक दोहराव
- ताड़ासन – 30 से 60 सेकंड
शुरुआत में कम समय रखें और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाएं। साइटिका में धीरे-धीरे और नियमित गतिविधि करना लंबे समय तक पूरी तरह आराम करने की तुलना में अधिक उपयोगी हो सकता है।
योग करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
1. दर्द को नजरअंदाज न करें
हल्का खिंचाव या मांसपेशियों में सामान्य तनाव महसूस होना अलग बात है, लेकिन तेज, जलन वाला या बिजली के झटके जैसा दर्द होने पर आसन रोक देना चाहिए।
2. अचानक मूवमेंट न करें
साइटिका के दौरान झटके से आगे झुकना, तेजी से ट्विस्ट करना या पैर को जोर से खींचना समस्या बढ़ा सकता है।
3. सांस रोककर अभ्यास न करें
प्रत्येक आसन में सामान्य और सहज सांस लेते रहें।
4. लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें
लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर हल्का चलना और शरीर की स्थिति बदलना उपयोगी हो सकता है।
5. शुरुआत धीरे करें
पहले दिन बहुत सारे आसन करने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान और आरामदायक गतिविधियों से शुरुआत करें।
6. हर व्यक्ति के लिए एक जैसा आसन जरूरी नहीं
साइटिका का कारण और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। जो आसन किसी व्यक्ति को आराम देता है, वह दूसरे व्यक्ति के लिए उपयुक्त न भी हो सकता है।
साइटिका में किन योगासनों से सावधान रहना चाहिए?
साइटिका के दौरान ऐसे आसनों से विशेष सावधानी रखें जिनमें:
- बहुत गहरा आगे झुकना हो।
- रीढ़ पर अत्यधिक ट्विस्ट हो।
- पैर को बहुत जोर से खींचना हो।
- अचानक शरीर का वजन एक पैर पर डालना हो।
- कमर को अत्यधिक पीछे मोड़ना हो।
- दर्द के बावजूद मुद्रा को लंबे समय तक बनाए रखना हो।
विशेष रूप से तीव्र साइटिका में हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच या गहरे स्ट्रेच से नस पर खिंचाव बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी स्ट्रेच को केवल उतनी सीमा तक करें जहां शरीर सहज महसूस करे।
योग के साथ अन्य कौन-सी आदतें मदद कर सकती हैं?
नियमित हल्की गतिविधि
यदि संभव हो तो छोटी अवधि की पैदल चाल या अन्य हल्की गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। गतिविधि को धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।
बैठने की मुद्रा सुधारें
लंबे समय तक झुककर बैठने से बचें। काम करते समय पीठ को यथासंभव प्राकृतिक स्थिति में रखें और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में न रहें।
शरीर को पर्याप्त आराम दें
आराम जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना सामान्यतः अच्छा विकल्प नहीं माना जाता। दर्द सहने योग्य होने पर धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों की ओर लौटना बेहतर हो सकता है।
अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करें
किसी और व्यक्ति की योग क्षमता को अपनी क्षमता का मानक न बनाएं। साइटिका में आरामदायक गति और नियंत्रित अभ्यास अधिक महत्वपूर्ण है।
साइटिका में डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
यदि दर्द घरेलू देखभाल के बावजूद ठीक नहीं हो रहा, बहुत तेज है या लगातार बढ़ रहा है, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। पैर में कमजोरी या बढ़ता हुआ सुन्नपन भी चिकित्सकीय मूल्यांकन की आवश्यकता हो सकता है।
तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें यदि:
- अचानक पैर में कमजोरी या गंभीर सुन्नपन हो।
- दोनों पैरों में बढ़ती कमजोरी हो।
- जननांग या गुदा के आसपास संवेदना कम हो जाए।
- पेशाब करने में कठिनाई हो।
- पेशाब या मल पर नियंत्रण न रहे।
- गंभीर चोट या दुर्घटना के बाद दर्द शुरू हुआ हो।
निष्कर्ष
साइटिका के दौरान योग का उद्देश्य केवल दर्द को दबाना नहीं, बल्कि शरीर को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से सक्रिय रखना होना चाहिए। मकरासन, बालासन, मार्जरी आसन, बिटिलासन, सुप्त पवनमुक्तासन, सेतु बंधासन, सुप्त मत्स्येंद्रासन, सुप्त कपोतासन का सरल रूप, अधोमुख श्वानासन का हल्का रूप, ताड़ासन और सुप्त पादांगुष्ठासन का सरल रूप कुछ ऐसे विकल्प हैं जिन्हें व्यक्ति अपनी सहनशीलता के अनुसार आजमा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दर्द बढ़ने पर योग को जबरदस्ती जारी न रखें। धीरे-धीरे अभ्यास करें, लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से बचें और जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लें। साइटिका में नियमित और सहनशील गतिविधि को धीरे-धीरे बढ़ाना अक्सर रिकवरी और दैनिक कार्यक्षमता बनाए रखने का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है







