परिवृत्त पार्श्वकोणासन कैसे करें? विधि, लाभ और सावधानियां
परिवृत्त पार्श्वकोणासन एक प्रभावी खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है, जिसमें शरीर को आगे की ओर झुकाते हुए धड़ को एक तरफ मोड़ा जाता है। यह आसन पैरों, कूल्हों, रीढ़, कंधों और पेट की मांसपेशियों पर काम करता है। नियमित अभ्यास से शरीर के संतुलन, लचीलेपन और स्थिरता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन क्या है?
परिवृत्त पार्श्वकोणासन को अंग्रेजी में Revolved Side Angle Pose कहा जाता है। यह पार्श्वकोणासन का एक ट्विस्टिंग रूप है। इसमें एक पैर आगे और दूसरा पैर पीछे रहता है, आगे के घुटने को मोड़कर शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है और फिर धड़ को आगे वाले पैर की दिशा में घुमाया जाता है।
यह एक चुनौतीपूर्ण योगासन है, क्योंकि इसमें पैरों की ताकत, कूल्हों का खुलाव, रीढ़ की गतिशीलता और संतुलन—इन सभी की आवश्यकता होती है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन के प्रमुख लाभ
1. रीढ़ की गतिशीलता में सहायता
इस आसन में धड़ को घुमाने से रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद मिलती है। नियंत्रित तरीके से अभ्यास करने पर रीढ़ की गतिशीलता और शरीर की घूर्णन क्षमता बेहतर हो सकती है।
2. पैरों को मजबूत बनाने में मदद
आगे वाले पैर का क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और ग्लूट्स तथा पीछे वाले पैर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। इससे पैरों की शक्ति और स्थिरता विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
3. कूल्हों के लचीलेपन को बढ़ावा
इस आसन में दोनों पैरों और कूल्हों की अलग-अलग स्थिति होती है, जिससे कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों में स्ट्रेच महसूस हो सकता है।
4. पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है
धड़ को घुमाने और शरीर को स्थिर रखने के दौरान कोर मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। इससे पेट और कमर के आसपास की मांसपेशियों की मजबूती और नियंत्रण में सहायता मिल सकती है।
5. संतुलन और एकाग्रता में सुधार
यह आसन शरीर को एक स्थिर स्थिति में रखते हुए ट्विस्ट करने की मांग करता है। इसलिए इसका अभ्यास शरीर के संतुलन, समन्वय और एकाग्रता को विकसित करने में मदद कर सकता है।
6. छाती और कंधों को खोलने में सहायता
ऊपरी हाथ को ऊपर की ओर ले जाने और छाती को खोलने से कंधों तथा ऊपरी शरीर में खिंचाव और गतिशीलता का अनुभव हो सकता है।
7. शरीर की समग्र स्थिरता बढ़ाने में मदद
पैरों, कोर और ऊपरी शरीर को एक साथ सक्रिय करने के कारण यह आसन शरीर की स्थिरता और पोस्टुरल नियंत्रण को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकता है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन करने की सही विधि
इस आसन को धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से करना चाहिए।
चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
सबसे पहले मैट पर सीधे खड़े हो जाएं। पैरों को एक साथ या आरामदायक दूरी पर रखें और कुछ सामान्य सांस लें।
चरण 2: आगे कदम रखें
अपने दाहिने पैर को आगे की ओर लंबा कदम बढ़ाकर रखें। दोनों पैरों के बीच पर्याप्त दूरी रखें ताकि आप आसानी से संतुलन बना सकें।
चरण 3: आगे वाले घुटने को मोड़ें
दाहिने घुटने को मोड़ते हुए शरीर को नीचे लाएं। कोशिश करें कि आगे वाला घुटना टखने के ऊपर रहे और पैर का तलवा जमीन पर स्थिर रहे।
पीछे वाले पैर को सीधा रखें और उसकी एड़ी को जमीन की ओर रखने का प्रयास करें।
चरण 4: धड़ को आगे झुकाएं
अपने धड़ को दाहिने पैर की ओर थोड़ा आगे झुकाएं। रीढ़ को जितना संभव हो लंबा रखें और छाती को सिकोड़ने के बजाय आगे की ओर बढ़ाने का प्रयास करें।
चरण 5: शरीर को घुमाएं
अब अपने धड़ को दाहिनी ओर घुमाएं। बाएं कंधे और छाती को दाहिनी दिशा में खोलने का प्रयास करें। ट्विस्ट रीढ़ से करने के बजाय पूरे धड़ को नियंत्रित रूप से घुमाएं।
चरण 6: हाथों की स्थिति बनाएं
यदि संभव हो तो बाएं हाथ को दाहिने पैर के बाहर जमीन पर रखें। दाहिने हाथ को ऊपर की ओर उठाएं और उंगलियों को फैलाएं।
यदि जमीन तक हाथ पहुंचाना मुश्किल हो तो योग ब्लॉक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
चरण 7: सिर की स्थिति
आरामदायक होने पर ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की ओर देखें। यदि गर्दन में खिंचाव महसूस हो तो सामने या नीचे की ओर देख सकते हैं।
चरण 8: सांस के साथ स्थिति बनाए रखें
धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें। अपनी क्षमता के अनुसार लगभग 15–30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें।
चरण 9: आसन से बाहर आएं
सांस लेते हुए पहले धड़ को धीरे-धीरे सीधा करें। हाथों को नीचे लाएं और आगे वाले घुटने को सीधा करें। फिर पैरों को आराम दें।
चरण 10: दूसरी तरफ दोहराएं
अब यही प्रक्रिया बाएं पैर को आगे रखकर दूसरी दिशा में दोहराएं।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन करते समय सांस लेने का तरीका
सांस इस आसन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- प्रारंभिक स्थिति में सामान्य और गहरी सांस लें।
- आगे झुकते समय सांस छोड़ना सुविधाजनक हो सकता है।
- धड़ को घुमाते समय सांस को रोकें नहीं।
- स्थिति में रहते हुए धीमी और समान सांस लेते रहें।
- आसन से बाहर आते समय सांस लेते हुए शरीर को धीरे-धीरे ऊपर लाएं।
सांस रोककर आसन करने से बचें।
शुरुआती लोगों के लिए आसान तरीका
यदि आप पहली बार परिवृत्त पार्श्वकोणासन कर रहे हैं, तो पूरी स्थिति में जाने की कोशिश न करें। शुरुआत में निम्न बातों का ध्यान रखें:
- पैरों के बीच पर्याप्त दूरी रखें।
- आगे वाले घुटने को नियंत्रित तरीके से मोड़ें।
- हाथ को जमीन तक पहुंचाने के लिए योग ब्लॉक का प्रयोग करें।
- पहले रीढ़ को लंबा करें, फिर ट्विस्ट करें।
- गर्दन को जबरदस्ती घुमाने की कोशिश न करें।
- कम समय तक आसन रोकें और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन में होने वाली सामान्य गलतियां
1. घुटने को अंदर की ओर गिराना
आगे वाले घुटने को पैर की मध्य दिशा में स्थिर रखें। घुटने को अंदर की ओर गिरने से बचाएं।
2. रीढ़ को गोल करना
आगे झुकते समय पीठ को अत्यधिक गोल न करें। रीढ़ को लंबा और छाती को खुला रखने का प्रयास करें।
3. जबरदस्ती ट्विस्ट करना
गहरी ट्विस्ट पाने के लिए शरीर को जोर से न घुमाएं। जितना आराम से हो उतना ही घुमाएं।
4. हाथ को जमीन तक पहुंचाने की कोशिश में शरीर बिगाड़ना
अगर हाथ जमीन तक नहीं पहुंचता तो ब्लॉक का इस्तेमाल करें। जमीन को छूना आसन का मुख्य लक्ष्य नहीं है।
5. गर्दन को जरूरत से ज्यादा घुमाना
सिर्फ ऊपर देखने के लिए गर्दन को खींचने की जरूरत नहीं है। गर्दन आरामदायक स्थिति में रखें।
6. सांस रोकना
कठिन आसन होने के कारण कई लोग अनजाने में सांस रोक लेते हैं। ऐसा न करें और लगातार सहज सांस लेते रहें।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन कितनी देर करें?
शुरुआती व्यक्ति प्रत्येक तरफ लगभग 10–15 सेकंड से शुरुआत कर सकते हैं। अभ्यास बढ़ने पर इसे 20–30 सेकंड तक रखा जा सकता है।
आसन की अवधि से अधिक महत्वपूर्ण सही तकनीक और आरामदायक सांस है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन से पहले कौन से आसन करें?
इस आसन से पहले शरीर को अच्छी तरह गर्म करना उपयोगी होता है। आप निम्न अभ्यास कर सकते हैं:
- ताड़ासन
- मार्जरीआसन-बितिलासन
- अधोमुख श्वानासन
- वीरभद्रासन I
- पार्श्वकोणासन
- त्रिकोणासन
- हल्का हिप ओपनिंग स्ट्रेच
इनसे पैरों, कूल्हों, रीढ़ और कंधों को अभ्यास के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन के बाद कौन से आसन करें?
अभ्यास के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लाने के लिए हल्के और आरामदायक आसन किए जा सकते हैं:
- बालासन
- पश्चिमोत्तानासन
- सुप्त मत्स्येंद्रासन
- सुखासन
- शवासन
परिवृत्त पार्श्वकोणासन में योग ब्लॉक का उपयोग
योग ब्लॉक शुरुआती लोगों के लिए काफी उपयोगी हो सकता है। यदि हाथ जमीन तक नहीं पहुंचता है, तो ब्लॉक को आगे वाले पैर के बाहर रखें और उस पर हाथ टिकाएं।
इससे शरीर को जबरदस्ती नीचे झुकाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और रीढ़ को अपेक्षाकृत लंबा बनाए रखना आसान हो सकता है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन की विविधताएं
अभ्यास के स्तर के अनुसार इस आसन को अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है।
सरल परिवृत्त पार्श्वकोणासन
नीचे वाले हाथ को जमीन के बजाय योग ब्लॉक पर रखें। यह शुरुआती लोगों के लिए अधिक आरामदायक विकल्प हो सकता है।
हाथों को नमस्कार मुद्रा में रखना
दोनों हथेलियों को छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में लाकर कोहनियों की सहायता से ट्विस्ट को थोड़ा गहरा किया जा सकता है। इसे केवल तब करें जब शरीर पर्याप्त रूप से तैयार हो।
बंध हाथों वाला रूप
अनुभवी साधक हाथों की अधिक चुनौतीपूर्ण स्थिति के साथ अभ्यास कर सकते हैं। इसे प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में करना बेहतर है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन करते समय सावधानियां
यह एक अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण ट्विस्टिंग आसन है, इसलिए निम्न सावधानियां रखें:
- शरीर को गर्म किए बिना गहरा ट्विस्ट न करें।
- घुटने पर अनावश्यक दबाव न डालें।
- रीढ़ को जबरदस्ती न मोड़ें।
- दर्द और सामान्य स्ट्रेच में अंतर समझें।
- तेज या चुभने वाला दर्द होने पर तुरंत आसन छोड़ दें।
- गर्दन को आरामदायक स्थिति में रखें।
- संतुलन कठिन लगे तो दीवार या योग ब्लॉक का सहारा लें।
यदि आपको रीढ़, घुटने, कूल्हे या कंधे से संबंधित चोट या कोई गंभीर समस्या है, तो इस आसन का अभ्यास करने से पहले योग्य योग प्रशिक्षक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन किसे नहीं करना चाहिए?
जिन लोगों को हाल ही में चोट लगी है या जिन्हें गंभीर घुटने, कूल्हे या रीढ़ की समस्या है, उन्हें बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन नहीं करना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान गहरे ट्विस्ट वाले आसनों का अभ्यास करने से पहले योग्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना आवश्यक है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन के लिए उपयोगी टिप्स
- हमेशा दोनों तरफ समान रूप से अभ्यास करें।
- शुरुआत में कम गहराई वाला ट्विस्ट रखें।
- पैर के तलवों को जमीन पर स्थिर रखें।
- कोर को हल्का सक्रिय रखें।
- सांस को सहज रखें।
- शरीर की क्षमता से आगे जाने की कोशिश न करें।
- सही एलाइनमेंट को आसन की गहराई से अधिक प्राथमिकता दें।
- नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे लचीलापन और नियंत्रण विकसित करें।
निष्कर्ष
परिवृत्त पार्श्वकोणासन एक शक्तिशाली ट्विस्टिंग योगासन है, जो पैरों की मजबूती, कूल्हों की गतिशीलता, कोर सक्रियता, रीढ़ की गतिशीलता, संतुलन और एकाग्रता पर काम करता है। इसे सही तकनीक, नियंत्रित गति और सहज सांस के साथ करना महत्वपूर्ण है।
शुरुआती साधकों को पहले सरल रूप से शुरुआत करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर योग ब्लॉक का उपयोग करना चाहिए। नियमित और सुरक्षित अभ्यास के साथ धीरे-धीरे आसन की स्थिरता और गहराई विकसित की जा सकती है।






