शशांक भुजंगासन कैसे करें? विधि, फायदे, सावधानियां और सही तकनीक
शशांक भुजंगासन एक महत्वपूर्ण योगासन है, जिसे अंग्रेजी में Striking Cobra Pose या Puppy Flow Variation के नाम से भी जाना जाता है। यह आसन शशांकासन (Rabbit Pose या Hare Pose) और भुजंगासन (Cobra Pose) का एक गतिशील संयोजन है। इसमें शरीर को आगे-पीछे ले जाकर रीढ़ की हड्डी, कंधों, छाती, पेट और कमर की मांसपेशियों को सक्रिय किया जाता है।
इस आसन में शुरुआत वज्रासन जैसी स्थिति से होती है। इसके बाद शरीर को आगे की ओर झुकाकर छाती को जमीन के पास लाया जाता है और फिर हाथों के सहारे छाती को आगे की ओर खिसकाते हुए भुजंगासन जैसी स्थिति बनाई जाती है।
शशांक भुजंगासन का नियमित और सही अभ्यास शरीर में लचीलापन बढ़ाने, रीढ़ की गतिशीलता सुधारने और पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करने में सहायक हो सकता है।
यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं और अपनी पीठ, कंधों तथा रीढ़ की गतिशीलता बनाए रखना चाहते हैं।
शशांक भुजंगासन करने के फायदे
शशांक भुजंगासन शरीर के कई हिस्सों पर एक साथ काम करता है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं।
1. रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ाता है
इस आसन में शरीर को आगे और पीछे ले जाने से रीढ़ की हड्डी में नियंत्रित गति होती है। इससे रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों में लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
2. पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
भुजंगासन जैसी स्थिति में छाती को ऊपर उठाने से पीठ की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। नियमित अभ्यास से पीठ की मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति बेहतर हो सकती है।
3. कंधों और छाती को खोलने में मदद करता है
आसन के दौरान हाथों को आगे फैलाने और फिर छाती को आगे उठाने से कंधों तथा छाती के आसपास के हिस्से में स्ट्रेच महसूस होता है। यह कंधों की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
4. पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है
शशांकासन से भुजंगासन की ओर जाने की प्रक्रिया में पेट और कोर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। इससे शरीर को नियंत्रित रखने की क्षमता विकसित होती है।
5. शरीर की मुद्रा सुधारने में सहायक
लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या डेस्क पर काम करने से कंधे आगे की ओर झुक सकते हैं। शशांक भुजंगासन में छाती को आगे और ऊपर उठाने की गति शरीर की मुद्रा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
6. कूल्हों और जांघों में लचीलापन बढ़ाता है
शुरुआती स्थिति में घुटनों को मोड़कर बैठने और आगे झुकने से कूल्हों तथा जांघों के आसपास हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है।
7. गर्दन और कंधों की गतिशीलता में मदद करता है
इस आसन में गर्दन को रीढ़ के साथ संतुलित रखते हुए आगे की ओर बढ़ने से गर्दन और कंधों की नियंत्रित गति का अभ्यास होता है। इससे शरीर के ऊपरी हिस्से की गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
8. शारीरिक तनाव कम करने में सहायक
योग के दौरान धीमी और गहरी सांस लेने से शरीर को आराम मिलता है। शशांक भुजंगासन का नियंत्रित अभ्यास शारीरिक तनाव और अकड़न को कम करने में सहायक हो सकता है।
9. शरीर के संतुलन और समन्वय में सुधार
इस आसन में सांस और शरीर की गति को एक साथ नियंत्रित करना पड़ता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने में मदद मिल सकती है।
10. शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखता है
आसन में आगे और पीछे की गतिशीलता के कारण शरीर के कई मांसपेशी समूह सक्रिय होते हैं। इससे नियमित योग अभ्यास में लचीलापन और गतिशीलता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
शशांक भुजंगासन करने की सही विधि
शशांक भुजंगासन का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए इसकी सही तकनीक और शरीर की स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है।
चरण 1: शुरुआती स्थिति बनाएं
- सबसे पहले योग मैट पर वज्रासन में बैठ जाएं।
- दोनों घुटनों को मोड़कर पैरों को पीछे की ओर रखें।
- दोनों पैरों के अंगूठे एक-दूसरे के पास रखें।
- कूल्हों को एड़ियों पर टिकाएं।
- रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और दोनों हाथों को जांघों पर रखें।
- कुछ सामान्य सांसें लेकर शरीर को आराम दें।
चरण 2: शशांकासन की स्थिति में आएं
- सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
- दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं।
- हथेलियों को जमीन पर रखें।
- माथे या ठुड्डी को आराम से जमीन की ओर लाएं।
- कूल्हों को एड़ियों के पास बनाए रखने का प्रयास करें।
- इस स्थिति में शरीर को आराम दें।
चरण 3: शरीर को आगे की ओर बढ़ाएं
- अब सांस लेते हुए दोनों हथेलियों पर हल्का दबाव डालें।
- धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर खिसकाएं।
- कूल्हों को एड़ियों से उठाकर आगे बढ़ाएं।
- छाती को दोनों हाथों के बीच से आगे की ओर ले जाएं।
- पेट और कूल्हों को धीरे-धीरे जमीन के पास लाएं।
चरण 4: भुजंगासन जैसी स्थिति बनाएं
- दोनों हाथों को कंधों के पास रखें।
- हथेलियां जमीन पर मजबूती से टिकी होनी चाहिए।
- सांस लेते हुए छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
- कोहनियों को हल्का मोड़कर शरीर के पास रखें।
- कंधों को कानों से दूर रखें।
- गर्दन को रीढ़ की सीध में रखते हुए सामने की ओर देखें।
- कमर पर अनावश्यक दबाव न डालें।
चरण 5: शुरुआती स्थिति में वापस आएं
- सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे छाती को नीचे लाएं।
- हाथों की सहायता से शरीर को पीछे की ओर ले जाएं।
- कूल्हों को वापस एड़ियों के पास लाएं।
- दोनों हाथों को सामने फैलाकर शशांकासन की स्थिति में आएं।
- इसके बाद धीरे-धीरे वज्रासन में वापस बैठ जाएं।
इस प्रकार शशांक भुजंगासन का एक चक्र पूरा होता है।
शशांक भुजंगासन करते समय सांस लेने का सही तरीका
इस आसन में सांस और शरीर की गति का तालमेल बहुत महत्वपूर्ण है।
| आसन की स्थिति | सांस लेने का तरीका |
|---|---|
| वज्रासन में बैठना | सामान्य सांस |
| आगे झुककर शशांकासन बनाना | सांस छोड़ें |
| शरीर को आगे बढ़ाना | सांस लें |
| छाती को ऊपर उठाना | सांस लें |
| वापस पीछे जाना | सांस छोड़ें |
| वज्रासन में लौटना | सामान्य सांस |
अभ्यास के दौरान सांस को रोककर न रखें। सांस हमेशा सहज और नियंत्रित होनी चाहिए।
शशांक भुजंगासन कितनी देर और कितनी बार करना चाहिए?
शशांक भुजंगासन का अभ्यास अपनी शारीरिक क्षमता और लचीलेपन के अनुसार करना चाहिए।
| अभ्यास का स्तर | अभ्यास की मात्रा |
|---|---|
| शुरुआती व्यक्ति | 3–5 चक्र |
| मध्यम स्तर | 5–8 चक्र |
| अनुभवी व्यक्ति | 8–10 चक्र |
| प्रत्येक स्थिति में रुकना | 2–5 सेकंड |
| अभ्यास की आवृत्ति | सप्ताह में 4–5 दिन |
शुरुआत में कम चक्रों से अभ्यास करें। शरीर की क्षमता बढ़ने पर धीरे-धीरे अभ्यास की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
शशांक भुजंगासन करते समय होने वाली सामान्य गलतियां
कई लोग इस आसन को करते समय शरीर की सही स्थिति पर ध्यान नहीं देते। इससे लाभ कम हो सकता है और चोट का जोखिम बढ़ सकता है।
1. कमर पर अधिक दबाव डालना
भुजंगासन की स्थिति में छाती को जरूरत से ज्यादा ऊपर उठाने से कमर पर दबाव बढ़ सकता है।
सही तरीका: छाती को उतना ही उठाएं जितना बिना दर्द और असुविधा के संभव हो।
2. कंधों को कानों के पास उठाना
कंधों को कानों की ओर खींचने से गर्दन और कंधों में तनाव हो सकता है।
सही तरीका: कंधों को नीचे और पीछे की ओर आराम से रखें।
3. हाथों पर जरूरत से ज्यादा वजन डालना
कुछ लोग शरीर को ऊपर उठाने के लिए पूरी ताकत हाथों पर लगा देते हैं।
सही तरीका: हाथों का सहारा लें, लेकिन पीठ की मांसपेशियों को भी सक्रिय रखें।
4. गर्दन को पीछे की ओर अधिक मोड़ना
सिर को बहुत पीछे झुकाने से गर्दन पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
सही तरीका: गर्दन को रीढ़ की प्राकृतिक दिशा में रखें और सामने की ओर देखें।
5. सांस रोककर अभ्यास करना
सांस रोकने से शरीर में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है।
सही तरीका: प्रत्येक गति के साथ सहज सांस लें और छोड़ें।
6. अचानक शरीर को आगे-पीछे करना
तेजी से शरीर को आगे और पीछे ले जाने से घुटनों, कंधों और कमर पर दबाव पड़ सकता है।
सही तरीका: पूरी गति धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से करें।
शशांक भुजंगासन करते समय सावधानियां
इस आसन का अभ्यास करते समय निम्नलिखित सावधानियों का पालन करना चाहिए।
- यदि कमर में तेज दर्द या गंभीर रीढ़ संबंधी समस्या है, तो विशेषज्ञ की सलाह के बिना अभ्यास न करें।
- घुटनों में चोट, सूजन या गंभीर दर्द होने पर इस आसन से बचें।
- कंधे या कलाई में चोट होने पर अभ्यास करने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट या योग विशेषज्ञ से सलाह लें।
- गर्भावस्था के दौरान इस आसन का अभ्यास बिना विशेषज्ञ की अनुमति के न करें।
- पेट की हाल ही में हुई सर्जरी के बाद चिकित्सकीय सलाह के बिना अभ्यास न करें।
- स्लिप डिस्क या गंभीर स्पाइनल समस्या वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
- भोजन करने के तुरंत बाद इस आसन का अभ्यास न करें।
- अभ्यास हमेशा समतल और फिसलन रहित योग मैट पर करें।
- किसी भी स्थिति में दर्द, झनझनाहट या चक्कर आने पर तुरंत अभ्यास रोक दें।
- शरीर को जबरदस्ती किसी भी स्थिति में न ले जाएं।
शशांक भुजंगासन किसे करना चाहिए?
शशांक भुजंगासन सामान्य रूप से स्वस्थ व्यक्तियों के लिए उपयोगी योग अभ्यास हो सकता है।
यह विशेष रूप से निम्नलिखित लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है:
- जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं।
- जिन्हें पीठ और कंधों में हल्की अकड़न महसूस होती है।
- जो रीढ़ की गतिशीलता बनाए रखना चाहते हैं।
- जो योग में आगे और पीछे झुकने वाले आसनों का अभ्यास करना चाहते हैं।
- जो शरीर के लचीलेपन और गतिशीलता पर काम करना चाहते हैं।
- जो अपने नियमित योग अभ्यास में गतिशील आसन शामिल करना चाहते हैं।
हालांकि, किसी भी पुरानी बीमारी या मस्कुलोस्केलेटल समस्या वाले व्यक्ति को अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार अभ्यास करना चाहिए।
शुरुआती लोगों के लिए शशांक भुजंगासन के आसान विकल्प
यदि आप पहली बार शशांक भुजंगासन कर रहे हैं, तो शुरुआत में पूरी गति करना जरूरी नहीं है। आप निम्नलिखित आसान अभ्यासों से शुरुआत कर सकते हैं।
1. बालासन
- घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठें।
- शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
- माथे को जमीन पर रखें।
- हाथों को सामने या शरीर के बगल में रखें।
- सामान्य सांस लेते हुए आराम करें।
2. स्फिंक्स पोज
- पेट के बल लेट जाएं।
- दोनों कोहनियों को कंधों के नीचे रखें।
- धीरे-धीरे छाती को ऊपर उठाएं।
- गर्दन को सीधा रखें।
- कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहें।
3. सरल भुजंगासन
- पेट के बल लेट जाएं।
- हथेलियों को कंधों के पास रखें।
- सांस लेते हुए छाती को थोड़ा ऊपर उठाएं।
- कोहनियों को मोड़कर शरीर के पास रखें।
- कुछ सेकंड बाद वापस नीचे आ जाएं।
इन अभ्यासों से शरीर को शशांक भुजंगासन के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
शशांक भुजंगासन और भुजंगासन में अंतर
दोनों आसनों में रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों पर काम होता है, लेकिन इनकी तकनीक अलग होती है।
| आधार | शशांक भुजंगासन | भुजंगासन |
|---|---|---|
| शुरुआत | वज्रासन या शशांकासन | पेट के बल लेटकर |
| शरीर की गति | आगे और पीछे | छाती को ऊपर उठाना |
| मुख्य गतिविधि | गतिशील अभ्यास | पीछे की ओर झुकाव |
| कूल्हों की स्थिति | आगे-पीछे बदलती है | जमीन के पास रहती है |
| प्रमुख प्रभाव | रीढ़ की गतिशीलता | पीठ और छाती का विस्तार |
| अभ्यास का प्रकार | गतिशील योगासन | स्थिर योगासन |
शशांक भुजंगासन का अभ्यास करने का सही समय
इस आसन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना अच्छा विकल्प है। सुबह शरीर अपेक्षाकृत तरोताजा रहता है और योग अभ्यास के लिए शांत वातावरण मिल सकता है।
यदि सुबह समय नहीं मिलता है, तो शाम को भी इसका अभ्यास किया जा सकता है। ध्यान रखें कि भोजन के तुरंत बाद अभ्यास न करें। भारी भोजन के बाद लगभग 3–4 घंटे का अंतर रखना उचित है।
अभ्यास से पहले हल्का वार्मअप करना चाहिए, जिसमें कलाई, कंधे, गर्दन, घुटनों और रीढ़ की हल्की गतिशीलता वाले अभ्यास शामिल हो सकते हैं।
शशांक भुजंगासन के बाद कौन से आसन करने चाहिए?
शशांक भुजंगासन के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लाने के लिए कुछ आरामदायक आसनों का अभ्यास किया जा सकता है।
- बालासन: पीठ और कंधों को आराम देने के लिए।
- मकरासन: पेट के बल लेटकर शरीर को आराम देने के लिए।
- वज्रासन: सामान्य बैठने की स्थिति में लौटने के लिए।
- मार्जरी आसन: रीढ़ की हल्की गतिशीलता के लिए।
- शवासन: पूरे शरीर को आराम देने के लिए।
आसन का चुनाव अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें। यदि किसी अभ्यास से दर्द बढ़ता है, तो उसे न करें।
शशांक भुजंगासन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
1. शशांक भुजंगासन रोज कर सकते हैं?
हां, यदि आप स्वस्थ हैं और आसन सही तरीके से कर रहे हैं, तो इसे नियमित रूप से किया जा सकता है। शुरुआत में 3–5 चक्र पर्याप्त हैं।
2. क्या शशांक भुजंगासन कमर के लिए फायदेमंद है?
यह आसन रीढ़ की नियंत्रित गतिशीलता और पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद कर सकता है। लेकिन कमर दर्द का इलाज नहीं है। गंभीर दर्द या स्लिप डिस्क होने पर विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
3. क्या शशांक भुजंगासन पेट की चर्बी कम करता है?
यह आसन पेट और कोर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है, लेकिन केवल इस आसन से पेट की चर्बी कम नहीं होती। वजन नियंत्रण के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
4. शशांक भुजंगासन कितनी बार करना चाहिए?
शुरुआती व्यक्ति 3–5 चक्र से शुरुआत कर सकते हैं। अभ्यास की क्षमता बढ़ने पर 5–10 चक्र किए जा सकते हैं।
5. क्या शशांक भुजंगासन पाचन के लिए अच्छा है?
इस आसन में पेट के आसपास हल्की गति और खिंचाव होता है। यह सामान्य योग दिनचर्या का हिस्सा हो सकता है, लेकिन पाचन संबंधी समस्याओं का उपचार नहीं है।
6. क्या बुजुर्ग लोग शशांक भुजंगासन कर सकते हैं?
स्वस्थ बुजुर्ग व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार संशोधित रूप में इसका अभ्यास कर सकते हैं। घुटनों, कलाई या कमर की समस्या होने पर पहले फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
7. क्या शशांक भुजंगासन वजन कम करने में मदद करता है?
यह एक हल्का गतिशील योग अभ्यास है, जो शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। वजन कम करने के लिए इसे नियमित व्यायाम और संतुलित आहार के साथ करना चाहिए।
8. क्या शशांक भुजंगासन शुरुआती लोग कर सकते हैं?
हां, शुरुआती लोग आसान विकल्पों से शुरुआत करके धीरे-धीरे इसकी पूरी तकनीक सीख सकते हैं। शुरुआत में शरीर पर अधिक दबाव नहीं डालना चाहिए।
निष्कर्ष
शशांक भुजंगासन एक उपयोगी गतिशील योगासन है, जिसमें शशांकासन और भुजंगासन की गतिविधियों का संयोजन होता है। यह रीढ़ की गतिशीलता बनाए रखने, पीठ और कंधों की मांसपेशियों को सक्रिय करने तथा शरीर के लचीलेपन और समन्वय को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
इस आसन का अभ्यास करते समय सही तकनीक, सांस का तालमेल और शरीर की क्षमता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। शुरुआत में कम चक्रों से अभ्यास करें और धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाएं।
समर्पण योग और फिजियोथेरेपी के माध्यम से सही योग तकनीक, शरीर की स्थिति और सुरक्षित अभ्यास के महत्व को समझकर आप अपनी दैनिक दिनचर्या में शशांक भुजंगासन को शामिल कर सकते हैं। याद रखें कि योग का उद्देश्य शरीर को जबरदस्ती मोड़ना नहीं, बल्कि उसे स्वस्थ, सक्रिय और लचीला बनाए रखना है।






