सिंहासन कैसे करें? चेहरे और गले के लिए योग
सिंहासन (Simhasana) एक पारंपरिक योगासन है, जिसे Lion Pose के नाम से भी जाना जाता है। यह योगासन खास तौर पर चेहरे, जबड़े, जीभ और गले की मांसपेशियों को सक्रिय करने के लिए जाना जाता है। इसमें शरीर की मुद्रा के साथ चेहरे और जीभ की विशेष स्थिति बनाई जाती है तथा सांस छोड़ते हुए सिंह जैसी मुद्रा और ध्वनि का अभ्यास किया जाता है।
नियमित और सही तरीके से सिंहासन का अभ्यास चेहरे की मांसपेशियों को सक्रिय करने, जबड़े के आसपास तनाव कम करने और गले के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। यह तनाव और मानसिक जकड़न को कम करने वाले सरल योग अभ्यासों में भी शामिल किया जा सकता है।
सिंहासन क्या है?
सिंहासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है—“सिंह” यानी शेर और “आसन” यानी बैठने की मुद्रा। इस आसन में व्यक्ति शेर जैसी मुद्रा बनाता है। घुटनों के बल बैठकर शरीर को स्थिर रखा जाता है, हथेलियों को घुटनों या जमीन पर रखा जाता है, मुंह खोला जाता है, जीभ को बाहर की ओर फैलाया जाता है और सांस छोड़ते हुए विशेष ध्वनि की जाती है।
यह सामान्य योगासनों से थोड़ा अलग है क्योंकि इसमें शरीर के साथ-साथ चेहरे की मांसपेशियों और जीभ की सक्रिय भागीदारी होती है।
सिंहासन करने की सही विधि
सिंहासन का अभ्यास करते समय आरामदायक और स्थिर स्थिति बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसे करने की विधि इस प्रकार है:
- सबसे पहले योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
- दोनों घुटनों को आरामदायक दूरी पर रखें।
- पैरों के पंजों को पीछे की ओर रखें और एड़ियों पर बैठने की स्थिति बनाएं।
- अपनी हथेलियों को घुटनों पर या जमीन पर रखें।
- रीढ़, गर्दन और सिर को सीधा रखें।
- नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें।
- अब मुंह को चौड़ा खोलें।
- जीभ को जितना आराम से हो सके बाहर निकालें और उसकी नोक को नीचे की ओर ले जाने का प्रयास करें।
- आंखों को खोलकर सामने या ऊपर की दिशा में देखें।
- अब मुंह से सांस को जोर से और नियंत्रित तरीके से बाहर छोड़ें।
- सांस छोड़ते समय “हा” जैसी सिंह की गर्जना से मिलती-जुलती ध्वनि करें।
- चेहरे, जीभ और गले में अनावश्यक तनाव न रखें।
- सामान्य सांस लेते हुए कुछ क्षण आराम करें।
- शुरुआत में 2–3 बार दोहराएं और अभ्यास बढ़ने पर इसे 4–6 बार तक किया जा सकता है।
सिंहासन में चेहरे की सही स्थिति
सिंहासन की खासियत इसका चेहरे का अभ्यास है। इसे करते समय:
- मुंह को आराम से पूरा खोलें।
- जीभ को बाहर निकालें, लेकिन उसे जबरदस्ती न खींचें।
- जीभ की नोक को नीचे की ओर ले जाने का प्रयास करें।
- जबड़े को ढीला रखें।
- आंखों को खोलकर एकाग्र दृष्टि बनाए रखें।
- सांस छोड़ते समय चेहरे की मांसपेशियों को सक्रिय करें।
- गर्दन को अत्यधिक पीछे न झुकाएं।
चेहरे की गतिविधियां आरामदायक होनी चाहिए। दर्द या असहजता होने पर अभ्यास को रोक देना बेहतर है।
सिंहासन के फायदे
सिंहासन शरीर के साथ-साथ चेहरे और गले के क्षेत्र पर भी ध्यान केंद्रित करता है। इसके संभावित फायदे इस प्रकार हैं:
1. चेहरे की मांसपेशियों को सक्रिय करता है
इस आसन में मुंह, जीभ, गाल और जबड़े की मांसपेशियों की सक्रिय भागीदारी होती है। इससे चेहरे की मांसपेशियों को हल्का व्यायाम मिलता है।
2. जबड़े के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है
चेहरे और जबड़े को सक्रिय करने के बाद आराम देने से जबड़े के आसपास जमा तनाव को कम करने में सहायता मिल सकती है।
3. गले के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाता है
जीभ, मुंह और गले की गतिविधियों के कारण इस अभ्यास में गले के क्षेत्र पर विशेष ध्यान जाता है।
4. चेहरे पर रक्त संचार को बढ़ावा दे सकता है
चेहरे की विभिन्न मांसपेशियों की सक्रियता चेहरे के क्षेत्र में रक्त संचार को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती है।
5. मानसिक तनाव कम करने में सहायक
सांस छोड़ते समय सिंह जैसी ध्वनि करने से शरीर और चेहरे में जमा तनाव को बाहर निकालने का अनुभव हो सकता है। यह अभ्यास मानसिक रूप से हल्का और आरामदायक महसूस करा सकता है।
6. चेहरे की जकड़न कम करने में मदद
लंबे समय तक स्क्रीन देखने, तनाव या लगातार एक ही चेहरे के भाव रखने से चेहरे की मांसपेशियों में जकड़न महसूस हो सकती है। सिंहासन चेहरे को सक्रिय और फिर रिलैक्स करने का अवसर देता है।
7. जीभ की गतिशीलता पर काम करता है
इस आसन में जीभ को बाहर निकालकर नीचे की ओर फैलाया जाता है, जिससे जीभ की गति और नियंत्रण पर ध्यान जाता है।
8. सांस छोड़ने के अभ्यास में मदद
सिंहासन में जोर से और नियंत्रित तरीके से सांस बाहर निकालने पर ध्यान दिया जाता है। इससे श्वास के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है।
9. आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति को बढ़ावा दे सकता है
सिंह जैसी मुद्रा और ध्वनि बनाना शुरुआत में असामान्य लग सकता है, लेकिन नियमित अभ्यास चेहरे की अभिव्यक्ति और शरीर के प्रति सहजता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
चेहरे के लिए सिंहासन कैसे उपयोगी है?
सिंहासन को एक पारंपरिक फेस-योग अभ्यास की तरह भी देखा जाता है। इसमें चेहरे की कई मांसपेशियां एक साथ सक्रिय होती हैं। मुंह खोलना, जीभ बाहर निकालना, आंखों को खोलना और सांस छोड़ना चेहरे के अलग-अलग हिस्सों में गतिशीलता लाता है।
हालांकि, सिंहासन को चेहरे की झुर्रियां हटाने या चेहरे का आकार बदलने का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए। इसके मुख्य लाभ मांसपेशियों की सक्रियता, चेहरे की गतिशीलता और तनाव कम करने से जुड़े हैं।
गले के लिए सिंहासन
सिंहासन में जीभ, मुंह और गले के आसपास की गतिविधियां शामिल होती हैं। सांस को जोर से बाहर छोड़ने के कारण गले के क्षेत्र में सक्रियता महसूस हो सकती है।
लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि सिंहासन किसी गले की बीमारी का इलाज नहीं है। यदि गले में दर्द, सूजन, निगलने में कठिनाई या लगातार आवाज बैठने जैसी समस्या है, तो योग के बजाय उचित चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
सिंहासन कितनी देर करना चाहिए?
सिंहासन में लंबे समय तक मुद्रा बनाए रखने की आवश्यकता नहीं होती। इसमें कुछ सेकंड की सक्रिय मुद्रा और नियंत्रित सांस छोड़ना पर्याप्त हो सकता है।
शुरुआती अभ्यास:
- 2–3 दोहराव
- प्रत्येक दोहराव में एक नियंत्रित सांस छोड़ना
- बीच में सामान्य सांस लेकर आराम
अभ्यस्त व्यक्ति:
- 4–6 दोहराव तक अभ्यास कर सकते हैं
- अभ्यास के बीच चेहरे और जबड़े को रिलैक्स रखें
अभ्यास की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है कि मुद्रा आरामदायक और नियंत्रित हो।
सिंहासन करने का सही समय
सिंहासन का अभ्यास आमतौर पर योग अभ्यास के दौरान किया जा सकता है। इसे सुबह शांत वातावरण में या योग सत्र के किसी उपयुक्त हिस्से में किया जा सकता है।
भोजन के तुरंत बाद इसका अभ्यास करने से बचना बेहतर है, विशेषकर यदि मुंह खोलने या सांस छोड़ने से असहजता महसूस होती हो।
सिंहासन करते समय सावधानियां
सिंहासन सामान्यतः सरल अभ्यास है, लेकिन कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
- चेहरे या जबड़े में दर्द होने पर अभ्यास न करें।
- जीभ को जबरदस्ती बाहर न खींचें।
- गर्दन को अत्यधिक पीछे न मोड़ें।
- सांस रोककर न रखें।
- बहुत तेज या अनियंत्रित आवाज न निकालें।
- आंखों पर अनावश्यक दबाव न डालें।
- घुटनों में दर्द होने पर बैठने की स्थिति को सुविधाजनक बनाएं।
- गले में दर्द या संक्रमण होने पर अभ्यास को टालें।
- यदि जबड़े से जुड़ी गंभीर समस्या है, तो विशेषज्ञ की सलाह लें।
सिंहासन करते समय होने वाली सामान्य गलतियां
1. जीभ को बहुत जोर से खींचना
जीभ को आराम से बाहर निकालना चाहिए। अधिक खिंचाव करने की जरूरत नहीं है।
2. गर्दन को पीछे ज्यादा झुकाना
सिर्फ चेहरे और गले की गतिविधि के लिए गर्दन को अत्यधिक पीछे ले जाना आवश्यक नहीं है।
3. सांस रोकना
सिंहासन में सांस छोड़ना मुख्य भाग है। सांस रोकने के बजाय सहज तरीके से सांस लें और छोड़ें।
4. जबड़े को जरूरत से ज्यादा कसना
मुंह खोलते समय जबड़े को तनावपूर्ण रखने के बजाय उसे सहज रखें।
5. बहुत अधिक जोर लगाना
सिंहासन में अभिव्यक्ति महत्वपूर्ण है, लेकिन दर्द या अत्यधिक खिंचाव पैदा करना इसका उद्देश्य नहीं है।
शुरुआती लोगों के लिए आसान तरीका
यदि घुटनों के बल बैठना कठिन लगता है, तो आप कुर्सी पर बैठकर भी चेहरे और जीभ की गतिविधियों का अभ्यास कर सकते हैं। रीढ़ को सीधा रखें, दोनों पैर जमीन पर रखें और फिर सिंहासन की चेहरे वाली गतिविधि करें।
इस संशोधित तरीके से शुरुआती लोग पहले चेहरे, जीभ और सांस छोड़ने की तकनीक सीख सकते हैं।
सिंहासन को योग रूटीन में कैसे शामिल करें?
आप सिंहासन को हल्के योग सत्र में इस प्रकार शामिल कर सकते हैं:
- 2–3 मिनट शांत बैठकर सांस पर ध्यान दें।
- कुछ हल्के गर्दन और कंधे के मूवमेंट करें।
- सुखासन या वज्रासन में बैठें।
- 2–3 बार सिंहासन करें।
- कुछ सामान्य गहरी सांस लें।
- अंत में कुछ मिनट शांत बैठकर शरीर को रिलैक्स करें।
सिंहासन के बाद क्या करें?
सिंहासन के बाद चेहरे, जबड़े और जीभ को पूरी तरह आराम दें। मुंह बंद करके सामान्य सांस लें और कुछ क्षण शांत रहें। यदि चेहरे या गले में खिंचाव महसूस हो, तो अभ्यास की तीव्रता कम करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सिंहासन रोज कर सकते हैं?
हां, यदि इसे आरामदायक तरीके से किया जाए तो इसे नियमित योग रूटीन में शामिल किया जा सकता है। शुरुआत कम दोहराव से करें।
क्या सिंहासन चेहरे की झुर्रियां दूर करता है?
सिंहासन चेहरे की मांसपेशियों को सक्रिय करता है, लेकिन झुर्रियों को निश्चित रूप से दूर करने का प्रमाणित उपचार नहीं है।
क्या सिंहासन गले के लिए अच्छा है?
यह जीभ, मुंह और गले के क्षेत्र की गतिविधियों तथा श्वास-जागरूकता पर काम करता है। हालांकि, किसी गले की बीमारी के इलाज के रूप में इसे नहीं देखना चाहिए।
क्या सिंहासन जबड़े के तनाव में मदद कर सकता है?
चेहरे और जबड़े को सक्रिय करके फिर रिलैक्स करने से हल्के तनाव में राहत महसूस हो सकती है। यदि जबड़े में लगातार दर्द या क्लिकिंग जैसी समस्या हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लें।
सिंहासन कितनी बार करना चाहिए?
शुरुआत में 2–3 बार पर्याप्त है। आराम और सहजता के अनुसार धीरे-धीरे 4–6 दोहराव तक बढ़ाया जा सकता है।
निष्कर्ष
सिंहासन एक सरल लेकिन अनोखा योग अभ्यास है, जिसमें शरीर की मुद्रा के साथ चेहरा, जीभ, जबड़ा, गला और सांस सक्रिय रूप से शामिल होते हैं। इसका नियमित और सही अभ्यास चेहरे की मांसपेशियों की सक्रियता, जबड़े के हल्के तनाव को कम करने, श्वास-जागरूकता और मानसिक रिलैक्सेशन में सहायक हो सकता है।
सर्वोत्तम परिणाम के लिए इसे बिना जोर लगाए, नियंत्रित सांस के साथ और आरामदायक सीमा में करें। यदि किसी प्रकार का दर्द या चिकित्सकीय समस्या है, तो अभ्यास शुरू करने से पहले योग्य योग विशेषज्ञ या स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेना बेहतर है।






