परिघासन(Gate Pose): शरीर के किनारों में लचीलापन और रीढ़ की गतिशीलता बढ़ाने वाला योगासन
परिघासन, जिसे Gate Pose के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रभावी घुटने के बल किया जाने वाला योगासन है। इसमें एक पैर को बगल की ओर सीधा फैलाकर शरीर को उसी दिशा में झुकाया जाता है। यह आसन विशेष रूप से शरीर के किनारों, कूल्हों, हैमस्ट्रिंग, रीढ़ और कंधों में खिंचाव प्रदान करता है।
नियमित और सही तरीके से परिघासन का अभ्यास करने से शरीर की गतिशीलता, संतुलन और लचीलेपन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है। यह योगासन शुरुआती और अनुभवी दोनों साधकों के लिए उपयोगी हो सकता है, हालांकि इसे अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
परिघासन क्या है?
“परिघ” का अर्थ द्वार या फाटक से जुड़ा हुआ होता है। इस आसन में शरीर की मुद्रा एक खुले हुए फाटक जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे Gate Pose कहा जाता है।
परिघासन में एक घुटना जमीन पर रहता है, जबकि दूसरा पैर शरीर के किनारे की ओर सीधा फैलाया जाता है। इसके बाद धड़ को फैले हुए पैर की दिशा में झुकाया जाता है। एक हाथ पैर पर या उसके पास रखा जा सकता है और दूसरा हाथ ऊपर की ओर ले जाकर शरीर के पार्श्व भाग में खिंचाव बढ़ाया जाता है।
परिघासन करने के फायदे
1. शरीर के किनारों में खिंचाव
यह आसन कमर, पसलियों और धड़ के दोनों ओर स्थित मांसपेशियों को स्ट्रेच करने में मदद करता है। लंबे समय तक बैठने या एक ही मुद्रा में रहने वाले लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है।
2. रीढ़ की गतिशीलता में सहायता
परिघासन में पार्श्व झुकाव होने के कारण रीढ़ को अलग दिशा में गतिशील करने का अवसर मिलता है। इससे नियमित अभ्यास के साथ रीढ़ की लचक और गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
3. हैमस्ट्रिंग को स्ट्रेच करता है
सीधा फैलाया गया पैर हैमस्ट्रिंग और पैर के पिछले हिस्से में अच्छा खिंचाव देता है। इससे पैरों के लचीलेपन को धीरे-धीरे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
4. कूल्हों की गतिशीलता में सुधार
यह आसन कूल्हों और पैरों के आसपास के क्षेत्रों को सक्रिय करता है तथा कूल्हों की गतिशीलता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
5. कंधों और बाहों को खोलने में सहायता
ऊपरी हाथ को सिर के ऊपर ले जाने से कंधे और बगल के आसपास के हिस्से में खिंचाव महसूस होता है। इससे ऊपरी शरीर की गतिशीलता पर भी काम किया जा सकता है।
6. शरीर के संतुलन पर काम करता है
एक घुटने और एक पैर के सहारे मुद्रा बनाए रखने से शरीर को स्थिर रखने की आवश्यकता होती है। नियमित अभ्यास से शरीर की जागरूकता और संतुलन में सहायता मिल सकती है।
7. छाती और पसलियों के क्षेत्र को खोलता है
जब ऊपरी हाथ को पीछे या आगे की ओर लंबा करते हुए शरीर को पार्श्व दिशा में झुकाया जाता है, तो छाती और पसलियों के आसपास विस्तार महसूस हो सकता है।
8. योग अभ्यास के लिए उपयोगी स्ट्रेच
परिघासन को ऐसे योग क्रम में शामिल किया जा सकता है जिसमें पैर, कूल्हे, रीढ़ और शरीर के पार्श्व हिस्से को तैयार करना हो।
परिघासन करने का सही तरीका
परिघासन का अभ्यास करते समय जल्दबाजी न करें। मुद्रा में जाने से पहले शरीर को हल्का गर्म करना बेहतर होता है।
- योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
- दोनों घुटनों को लगभग कूल्हों की चौड़ाई पर रखें।
- दाएं पैर को दाईं ओर सीधा फैलाएं।
- दाएं पैर का तलवा जमीन पर रखें और पैर की उंगलियों को आगे की दिशा में रखें।
- बायां घुटना जमीन पर स्थिर रखें।
- सांस लेते हुए दोनों भुजाओं को कंधों की ऊंचाई तक फैलाएं।
- सांस छोड़ते हुए धड़ को धीरे-धीरे दाईं ओर झुकाएं।
- दायां हाथ दाएं पैर, पिंडली या टखने के पास रखें, लेकिन शरीर को जबरदस्ती नीचे न खींचें।
- बाएं हाथ को सिर के ऊपर से दाईं ओर ले जाएं।
- बाएं हाथ को लंबा रखते हुए शरीर के बाएं पार्श्व हिस्से में खिंचाव महसूस करें।
- गर्दन को आरामदायक रखें और सामने या ऊपर की ओर देख सकते हैं।
- कुछ धीमी और सहज सांसों तक मुद्रा बनाए रखें।
- सांस लेते हुए धीरे-धीरे वापस ऊपर आएं।
- पैर को वापस घुटने के पास लाएं।
- दूसरी तरफ भी यही प्रक्रिया दोहराएं।
परिघासन करते समय सांस लेने का तरीका
सांस इस आसन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- प्रारंभिक स्थिति में गहरी और सहज सांस लें।
- शरीर को बगल की ओर झुकाते समय धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
- मुद्रा में रहते हुए सामान्य गति से सांस लेते रहें।
- प्रत्येक सांस के साथ शरीर के खिंचे हुए हिस्से को आराम देने की कोशिश करें।
- मुद्रा से बाहर आते समय सांस लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठें।
सांस रोककर मुद्रा में रहने से बचें।
शुरुआती लोगों के लिए परिघासन
अगर आपकी हैमस्ट्रिंग या कूल्हों में पर्याप्त लचीलापन नहीं है, तो पैर को पूरी तरह सीधा रखने में कठिनाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में शरीर को नीचे ले जाने की कोशिश करने के बजाय आरामदायक सीमा तक ही झुकें।
आप शुरुआत में:
- फैले हुए पैर को थोड़ा मोड़ सकते हैं।
- हाथ को पैर तक पहुंचाने के बजाय योग ब्लॉक पर रख सकते हैं।
- ऊपरी हाथ को पूरी तरह सिर के ऊपर ले जाने के बजाय कंधे की ऊंचाई पर रख सकते हैं।
- मुद्रा को कम समय तक बनाए रखकर धीरे-धीरे अवधि बढ़ा सकते हैं।
आसन का उद्देश्य शरीर को अधिकतम सीमा तक मोड़ना नहीं, बल्कि नियंत्रित और आरामदायक खिंचाव प्राप्त करना है।
परिघासन में सामान्य गलतियां
1. पैर पर अत्यधिक दबाव डालना
हाथ को पैर पर रखते समय पूरा वजन उस पर डालने से बचें। हाथ का उपयोग केवल हल्के सहारे के लिए करें।
2. शरीर को जबरदस्ती नीचे झुकाना
गहराई से झुकने के लिए शरीर को खींचना मांसपेशियों पर अनावश्यक तनाव डाल सकता है। अपनी प्राकृतिक सीमा में रहें।
3. घुटने की गलत स्थिति
घुटने को असहज स्थिति में मोड़ने या घुमाने से बचें। जमीन पर मौजूद घुटना स्थिर और आरामदायक होना चाहिए।
4. कंधे को कान की ओर उठाना
ऊपरी हाथ को ऊपर ले जाते समय कंधे को कान से दूर और गर्दन को आरामदायक रखने की कोशिश करें।
5. सांस रोकना
खिंचाव अधिक महसूस होने पर भी सांस को रोकना उचित नहीं है। धीमी और सामान्य सांस लेते रहें।
6. आगे की ओर झुकना
यह मुख्य रूप से पार्श्व झुकाव वाला आसन है। शरीर को आगे की ओर गिराने के बजाय छाती और धड़ को बगल की दिशा में लंबा रखने का प्रयास करें।
परिघासन को आसान बनाने के लिए योग प्रॉप्स
योग ब्लॉक
योग ब्लॉक को फैले हुए पैर के अंदर या बाहर रखकर हाथ को उस पर टिकाया जा सकता है। इससे जमीन तक पहुंचने की आवश्यकता कम हो जाती है।
मुड़ा हुआ कंबल
घुटने के नीचे मुड़ा हुआ कंबल रखने से संवेदनशील घुटनों को अतिरिक्त आराम मिल सकता है।
योग मैट
नरम और स्थिर योग मैट घुटनों को आवश्यक कुशनिंग प्रदान कर सकता है।
परिघासन को योग रूटीन में कैसे शामिल करें?
परिघासन को वार्म-अप के बाद या ऐसे अभ्यासों के बीच शामिल किया जा सकता है जिनमें कूल्हों और पैरों की गतिशीलता पर ध्यान दिया जाता है।
एक सरल क्रम इस प्रकार हो सकता है:
बालासन → मार्जरीआसन-बितिलासन → अधोमुख श्वानासन → लो लंज → परिघासन → पश्चिमोत्तानासन → शवासन
अपने शरीर की जरूरत के अनुसार इस क्रम की अवधि और तीव्रता बदल सकते हैं।
परिघासन कितनी देर करना चाहिए?
शुरुआती साधक प्रत्येक तरफ लगभग 15–30 सेकंड से शुरुआत कर सकते हैं। अभ्यास सहज लगने पर इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
योग में समय से अधिक महत्वपूर्ण शरीर की प्रतिक्रिया है। यदि तेज दर्द, चुभन या असामान्य दबाव महसूस हो तो मुद्रा से बाहर आ जाएं।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
निम्न स्थितियों में परिघासन का अभ्यास विशेष सावधानी से करना चाहिए:
- घुटने में चोट या गंभीर दर्द
- कूल्हे की चोट
- हैमस्ट्रिंग में खिंचाव या चोट
- रीढ़ से संबंधित गंभीर समस्या
- संतुलन की गंभीर समस्या
- हाल ही में हुई सर्जरी
- शरीर को बगल की ओर झुकाने में तेज दर्द
यदि आपको कोई चोट या चिकित्सकीय समस्या है, तो योग शिक्षक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेकर अभ्यास करें।
परिघासन का अभ्यास करते समय सुरक्षा सुझाव
- हमेशा हल्के वार्म-अप के बाद अभ्यास करें।
- खाली या बहुत भारी पेट पर अभ्यास करना बेहतर होता है।
- दोनों तरफ समान रूप से अभ्यास करें।
- दर्द और सामान्य स्ट्रेच के बीच अंतर समझें।
- शरीर की क्षमता से अधिक गहराई में न जाएं।
- घुटने को मैट पर आरामदायक स्थिति में रखें।
- गर्दन को ढीला और कंधों को आरामदायक रखें।
- नियमित अभ्यास करें, लेकिन शरीर को पर्याप्त आराम भी दें।
परिघासन के मानसिक लाभ
परिघासन केवल शारीरिक स्ट्रेच तक सीमित नहीं है। इसे धीमी और नियंत्रित सांसों के साथ करने से व्यक्ति अपने शरीर की गतिविधियों और सांस पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है। इससे योग अभ्यास के दौरान एकाग्रता और शरीर-जागरूकता विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
परिघासन के बाद कौन से आसन करें?
अभ्यास के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लाने के लिए हल्के और आरामदायक आसन किए जा सकते हैं, जैसे:
- बालासन
- सुखासन
- पश्चिमोत्तानासन
- सुप्त बद्ध कोणासन
- शवासन
आसन चुनते समय इस बात का ध्यान रखें कि शरीर को अतिरिक्त तनाव न मिले।
निष्कर्ष
परिघासन (Gate Pose) शरीर के पार्श्व हिस्सों, हैमस्ट्रिंग, कूल्हों, रीढ़ और कंधों पर काम करने वाला उपयोगी योगासन है। इसका नियमित अभ्यास लचीलेपन, गतिशीलता, संतुलन और शरीर-जागरूकता को बेहतर बनाए रखने में सहायता कर सकता है।
इस आसन का सबसे महत्वपूर्ण नियम है कि इसे धीरे, नियंत्रित तरीके से और अपनी क्षमता के अनुसार किया जाए। गहराई से मुद्रा में जाने की बजाय सही संरेखण, सहज सांस और आरामदायक खिंचाव पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।







