प्लांटर फैसियाइटिस के लिए 10 सर्वश्रेष्ठ योगासन
प्लांटर फैसियाइटिस पैर के तलवे और एड़ी में होने वाले दर्द का एक आम कारण है। इसमें प्लांटर फैसिया नामक मजबूत ऊतक पर बार-बार तनाव पड़ सकता है। यह ऊतक एड़ी की हड्डी से पैर की उंगलियों तक फैला होता है और पैर के आर्च को सहारा देता है। इस समस्या में सुबह बिस्तर से उठकर पहला कदम रखते समय एड़ी में तेज या चुभने वाला दर्द महसूस होना आम है। लंबे समय तक बैठने के बाद चलने या ज्यादा देर खड़े रहने पर भी दर्द बढ़ सकता है।
प्लांटर फैसियाइटिस में पिंडली, एड़ी, टखने और पैर के तलवे की नियमित लेकिन हल्की स्ट्रेचिंग उपयोगी हो सकती है। योग के कुछ आसन पैरों और पिंडलियों की लचक, संतुलन और मांसपेशियों की सक्रियता पर काम कर सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए हर आसन उपयुक्त नहीं होता। दर्द बढ़ने पर आसन रोकना जरूरी है।
प्लांटर फैसियाइटिस क्या है?
प्लांटर फैसिया पैर के तलवे के नीचे मौजूद एक मजबूत ऊतक है। यह एड़ी को पैर की उंगलियों से जोड़ता है और चलते समय पैर के आर्च को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जब इस क्षेत्र पर अत्यधिक या बार-बार दबाव पड़ता है, तो दर्द और जकड़न हो सकती है। इसके पीछे लंबे समय तक खड़े रहना, अचानक व्यायाम बढ़ाना, दौड़ना, पैरों पर अधिक दबाव या पिंडली की मांसपेशियों में जकड़न जैसे कई कारण हो सकते हैं।
सामान्य लक्षण
- एड़ी के नीचे दर्द
- पैर के तलवे में चुभन या खिंचाव
- सुबह पहला कदम रखते समय तेज दर्द
- लंबे समय तक बैठने के बाद उठने पर दर्द
- ज्यादा देर खड़े रहने पर एड़ी में दर्द
- चलने या व्यायाम के बाद असहजता
- पैर के आर्च में जकड़न
प्लांटर फैसियाइटिस के लिए 10 सर्वश्रेष्ठ योगासन
1. ताड़ासन (Tadasana)
ताड़ासन एक सरल खड़े होकर किया जाने वाला आसन है। इसमें पैरों को जमीन पर स्थिर रखते हुए शरीर के संरेखण और संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।

करने का तरीका
- सीधे खड़े हो जाएं।
- दोनों पैरों के बीच आरामदायक दूरी रखें।
- पैरों की उंगलियों को आगे की ओर रखें।
- दोनों पैरों पर वजन समान रूप से बांटें।
- रीढ़ को सीधा रखें।
- कंधों को ढीला रखें।
- पेट को हल्का सक्रिय रखें।
- सामान्य गति से सांस लेते रहें।
- 20–30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें।
- धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौटें।
लाभ
- पैरों की स्थिरता पर काम करता है।
- शरीर के संतुलन में सहायता कर सकता है।
- सही खड़े होने की आदत विकसित करने में मदद करता है।
- पैरों पर वजन के वितरण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।
सावधानी
यदि खड़े होने से एड़ी में दर्द बढ़ता है, तो इस आसन को कम समय के लिए करें या दीवार का सहारा लें।
2. अधोमुख श्वानासन (Adho Mukha Svanasana)
अधोमुख श्वानासन पिंडली और पैरों के पीछे की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने वाला लोकप्रिय योगासन है। प्लांटर फैसियाइटिस में इसे धीरे-धीरे करना चाहिए।

करने का तरीका
- चारों हाथ-पैरों के बल आ जाएं।
- हथेलियां कंधों के नीचे रखें।
- घुटनों को कूल्हों के नीचे रखें।
- सांस छोड़ते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं।
- शरीर को उल्टे V के आकार में लाएं।
- शुरुआत में घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखना ठीक है।
- एड़ियों को धीरे-धीरे नीचे की दिशा में ले जाएं।
- 15–30 सेकंड तक सामान्य सांस लें।
- घुटनों को मोड़ें और धीरे-धीरे शुरुआती स्थिति में लौटें।
लाभ
- पिंडलियों में खिंचाव देने में मदद कर सकता है।
- टखने की गतिशीलता पर काम करता है।
- पैरों के पीछे की मांसपेशियों में जकड़न कम करने में सहायक हो सकता है।
- पूरे निचले शरीर में लचीलापन विकसित करने में मदद करता है।
सावधानी
एड़ियों को जमीन पर लगाने के लिए जबरदस्ती न करें। यदि एड़ी में तेज दर्द हो तो घुटनों को थोड़ा मोड़कर आसन करें।
3. उत्तानासन (Uttanasana)
उत्तानासन खड़े होकर आगे की ओर झुकने वाला आसन है। यह हैमस्ट्रिंग और पिंडली की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव पैदा कर सकता है।

करने का तरीका
- ताड़ासन से शुरुआत करें।
- पैरों को आरामदायक दूरी पर रखें।
- सांस लेते हुए रीढ़ को लंबा करें।
- सांस छोड़ते हुए कूल्हों से आगे झुकें।
- हाथों को फर्श, पैरों या योग ब्लॉक पर रखें।
- जरूरत हो तो घुटनों को थोड़ा मोड़ें।
- सिर और गर्दन को आराम दें।
- 15–30 सेकंड तक रहें।
- धीरे-धीरे ऊपर आएं।
लाभ
- पिंडली और हैमस्ट्रिंग में लचीलापन बढ़ाने में मदद कर सकता है।
- पैरों के पीछे के हिस्से की जकड़न कम करने में सहायक हो सकता है।
- टखने के आसपास हल्की गतिशीलता में मदद करता है।
सावधानी
पैरों के तलवे या एड़ी में दर्द बढ़े तो आगे ज्यादा न झुकें।
4. वीरभद्रासन I (Virabhadrasana I)
वीरभद्रासन I पैरों की ताकत, संतुलन और स्थिरता पर काम करने वाला आसन है।

करने का तरीका
- सीधे खड़े हों।
- एक पैर को पीछे ले जाएं।
- आगे वाले घुटने को धीरे-धीरे मोड़ें।
- पीछे वाले पैर को स्थिर रखें।
- पीछे की एड़ी को अपनी क्षमता के अनुसार जमीन पर रखें।
- धड़ को आगे की ओर रखें।
- दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
- रीढ़ को लंबा रखें।
- कुछ गहरी सांसों तक मुद्रा बनाए रखें।
- धीरे-धीरे पैर बदलकर दूसरी तरफ दोहराएं।
लाभ
- पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद करता है।
- टखने की स्थिरता पर काम करता है।
- संतुलन और शरीर के संरेखण को बेहतर करने में सहायक हो सकता है।
- निचले शरीर की ताकत बढ़ाने में मदद करता है।
सावधानी
एड़ी में दर्द होने पर पीछे वाले पैर की स्थिति को छोटा करें और आवश्यकता हो तो दीवार का सहारा लें।
5. उत्कटासन (Utkatasana)
उत्कटासन को चेयर पोज भी कहा जाता है। यह जांघों, पैरों और निचले शरीर को सक्रिय करने वाला आसन है।

करने का तरीका
- ताड़ासन में खड़े हों।
- दोनों पैरों को स्थिर रखें।
- हाथों को सामने या ऊपर उठाएं।
- घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ें।
- कूल्हों को पीछे की ओर ले जाएं, जैसे आप कुर्सी पर बैठ रहे हों।
- वजन दोनों पैरों पर समान रखें।
- रीढ़ को लंबा रखें।
- 10–20 सेकंड तक रुकें।
- धीरे-धीरे घुटनों को सीधा करें।
लाभ
- पैरों और जांघों को मजबूत करने में मदद करता है।
- पैरों की स्थिरता पर काम करता है।
- निचले शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।
- संतुलन और शरीर के नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
सावधानी
यदि इस आसन में एड़ी का दर्द बढ़े, तो घुटनों को कम मोड़ें और मुद्रा की अवधि घटाएं।
6. दंडासन में हैमस्ट्रिंग और पिंडली स्ट्रेच
यह बैठकर किया जाने वाला स्ट्रेच है और विशेष रूप से पिंडली तथा पैर के पीछे के हिस्से में लचीलापन बढ़ाने के लिए उपयोगी हो सकता है।

करने का तरीका
- जमीन पर बैठकर दोनों पैर सामने फैलाएं।
- घुटनों को आरामदायक रूप से सीधा रखें।
- पंजों को अपनी ओर रखें।
- रीढ़ को सीधा रखें।
- धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें।
- यदि पहुंचने में परेशानी हो तो पैर के पंजे के चारों ओर तौलिया या योग स्ट्रैप लगाएं।
- स्ट्रैप को धीरे से अपनी ओर खींचें।
- पिंडली में हल्का खिंचाव महसूस करें।
- 15–30 सेकंड तक रुकें।
- आराम करें और दूसरी तरफ भी करें।
पिंडली और पैर के पीछे की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग प्लांटर फैसिया पर पड़ने वाले तनाव को कम करने वाली दिनचर्या का हिस्सा हो सकती है।
7. पैर की उंगलियों का प्लांटर फैसिया स्ट्रेच
यह एक सरल स्ट्रेच है जिसमें पैर की उंगलियों को धीरे-धीरे पीछे की ओर खींचा जाता है। इससे पैर के आर्च के क्षेत्र में हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है।

करने का तरीका
- कुर्सी पर आराम से बैठें।
- एक पैर को दूसरे घुटने के ऊपर रखें।
- एक हाथ से एड़ी को सहारा दें।
- दूसरे हाथ से पैर की उंगलियों को धीरे-धीरे पीछे की ओर खींचें।
- पैर के आर्च में हल्का खिंचाव महसूस करें।
- लगभग 20–30 सेकंड तक रुकें।
- पैर को आराम दें।
- 2–3 बार दोहराएं।
- दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया करें।
यह स्ट्रेच प्लांटर फैसिया को सीधे लक्ष्य करता है और नियमित स्ट्रेचिंग कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है।
ध्यान रखें
उंगलियों को अचानक या जोर से पीछे न खींचें। केवल हल्का और आरामदायक खिंचाव होना चाहिए।
8. बद्ध कोणासन (Baddha Konasana)
बद्ध कोणासन को बटरफ्लाई पोज भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से कूल्हों और जांघों पर काम करता है और पैरों को आरामदायक स्थिति में रखने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

करने का तरीका
- जमीन पर बैठें।
- दोनों पैरों के तलवों को आपस में मिलाएं।
- एड़ियों को अपनी सुविधा के अनुसार शरीर के पास लाएं।
- पैरों को हाथों से पकड़ें।
- रीढ़ को सीधा रखें।
- घुटनों को आराम से नीचे की ओर रहने दें।
- घुटनों को हाथ से जबरदस्ती नीचे न दबाएं।
- सामान्य सांस लेते रहें।
- 20–30 सेकंड तक मुद्रा में रहें।
- धीरे-धीरे पैरों को अलग करें।
लाभ
- कूल्हों और जांघों में लचीलापन बढ़ाने में मदद कर सकता है।
- पैरों को आराम देने वाली योग दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है।
- बैठकर किए जाने वाले हल्के अभ्यास के लिए उपयोगी है।
9. वृक्षासन (Vrikshasana)
वृक्षासन संतुलन और एक पैर की स्थिरता पर काम करने वाला आसन है। प्लांटर फैसियाइटिस में इसे दर्द के स्तर के अनुसार करना चाहिए।

करने का तरीका
- ताड़ासन में खड़े हों।
- एक पैर पर धीरे-धीरे वजन डालें।
- दूसरे पैर को उठाएं।
- उठाए हुए पैर को पिंडली या जांघ के अंदर रखें।
- पैर को घुटने के जोड़ पर न रखें।
- जरूरत हो तो दीवार का सहारा लें।
- हाथों को नमस्कार मुद्रा में रखें।
- सामान्य सांस लेते रहें।
- 10–20 सेकंड तक संतुलन बनाए रखें।
- धीरे से पैर नीचे रखें और दूसरी तरफ दोहराएं।
लाभ
- संतुलन सुधारने में मदद करता है।
- पैर और टखने की स्थिरता पर काम करता है।
- पैर की छोटी मांसपेशियों को सक्रिय करने में सहायक हो सकता है।
सावधानी
यदि एक पैर पर खड़े होने से एड़ी में दर्द बढ़ता है, तो यह आसन न करें या इसे विशेषज्ञ की सलाह से संशोधित करें।
10. विपरीत करणी (Viparita Karani)
विपरीत करणी एक आरामदायक रेस्टोरेटिव योग मुद्रा है जिसमें पैरों को दीवार के सहारे ऊपर रखा जाता है।

करने का तरीका
- दीवार के पास बैठें।
- धीरे से एक तरफ झुककर पीठ के बल लेट जाएं।
- दोनों पैरों को दीवार के सहारे ऊपर रखें।
- पैरों को पूरी तरह सीधा रखना जरूरी नहीं है।
- हाथों को शरीर के दोनों ओर आराम से रखें।
- आंखें बंद करें।
- धीमी और गहरी सांस लें।
- 2–5 मिनट तक आराम करें।
- घुटनों को मोड़कर धीरे-धीरे मुद्रा से बाहर आएं।
लाभ
- पैरों को आराम देने में मदद कर सकता है।
- लंबे समय तक खड़े रहने के बाद आरामदायक हो सकता है।
- योग अभ्यास के अंत में रिलैक्सेशन के लिए उपयोगी है।
प्लांटर फैसियाइटिस के लिए आसान योग रूटीन
शुरुआत करने वालों के लिए पूरी दिनचर्या को इस तरह व्यवस्थित किया जा सकता है:
| क्रम | अभ्यास | अवधि |
|---|---|---|
| 1 | ताड़ासन | 20–30 सेकंड |
| 2 | पैर की उंगलियों का स्ट्रेच | 20–30 सेकंड प्रति पैर |
| 3 | दंडासन स्ट्रेच | 15–30 सेकंड |
| 4 | अधोमुख श्वानासन | 15–30 सेकंड |
| 5 | वीरभद्रासन I | 15–20 सेकंड प्रति तरफ |
| 6 | उत्कटासन | 10–20 सेकंड |
| 7 | बद्ध कोणासन | 20–30 सेकंड |
| 8 | वृक्षासन | 10–20 सेकंड प्रति तरफ |
| 9 | उत्तानासन | 15–30 सेकंड |
| 10 | विपरीत करणी | 2–5 मिनट |
शुरुआत में कम समय से अभ्यास करें और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं। नियमित स्ट्रेचिंग महत्वपूर्ण है; विशेषज्ञ स्रोत पिंडली और प्लांटर फैसिया की स्ट्रेचिंग को उपचार कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
सुबह प्लांटर फैसियाइटिस में क्या करें?
कई लोगों में सुबह पहला कदम सबसे ज्यादा दर्दनाक हो सकता है। इसलिए बिस्तर से तुरंत उठकर तेजी से चलने के बजाय कुछ हल्के पैर और टखने के मूवमेंट करना मददगार हो सकता है।
आप बिस्तर पर या कुर्सी पर बैठकर:
- पैर की उंगलियों को धीरे-धीरे अपनी ओर खींच सकते हैं।
- टखने को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे कर सकते हैं।
- पैर को गोलाकार दिशा में हल्का घुमा सकते हैं।
- पिंडली का हल्का स्ट्रेच कर सकते हैं।
- इसके बाद धीरे-धीरे खड़े हो सकते हैं।
पैर की उंगलियों को धीरे से पीछे खींचने और पिंडली की स्ट्रेचिंग को प्लांटर फैसियाइटिस के लिए सामान्य घरेलू व्यायाम कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।
प्लांटर फैसियाइटिस में किन चीजों से बचें?
योग करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- दर्द को सहन करते हुए जबरदस्ती स्ट्रेच न करें।
- एड़ी को जमीन पर दबाने के लिए जोर न लगाएं।
- अचानक कठिन योगासन शुरू न करें।
- लंबे समय तक पैर पर पूरा भार डालने वाले आसनों से शुरुआत न करें।
- दर्द बढ़ने पर अभ्यास जारी न रखें।
- दौड़ने और कूदने जैसी हाई-इम्पैक्ट गतिविधियां लक्षण बढ़ा रही हों तो उन्हें कुछ समय के लिए कम करें।
- नंगे पैर कठोर सतह पर लंबे समय तक चलने से बचें यदि इससे दर्द बढ़ता है।
- बहुत घिसे हुए या अपर्याप्त सपोर्ट वाले जूते पहनने से बचें।
प्लांटर फैसियाइटिस में गतिविधियों को लक्षणों के अनुसार बदलना महत्वपूर्ण है। कम प्रभाव वाली गतिविधियां, जैसे तैरना या साइकिल चलाना, कुछ लोगों के लिए अधिक आरामदायक हो सकती हैं, बशर्ते उनसे दर्द न बढ़े।
योग के साथ पैर की मालिश
योग के अलावा पैर के तलवे पर हल्की रोलिंग कुछ लोगों को आराम दे सकती है। इसके लिए टेनिस बॉल या ठंडी पानी की बोतल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
तरीका
- कुर्सी पर बैठें।
- पैर के नीचे बॉल या बोतल रखें।
- एड़ी से पंजे की दिशा में धीरे-धीरे रोल करें।
- बहुत ज्यादा दबाव न डालें।
- कुछ मिनट तक करें।
- दूसरे पैर से दोहराएं।
यदि रोलिंग से दर्द बढ़ता है, तो इसे रोक दें।
प्लांटर फैसियाइटिस में जूते क्यों महत्वपूर्ण हैं?
योग के साथ रोजमर्रा में पहने जाने वाले जूतों पर भी ध्यान देना जरूरी है। ऐसे जूते चुनें जो पैर को पर्याप्त सहारा दें और जिनमें चलने पर एड़ी पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
यदि किसी विशेष जूते में चलने के बाद दर्द बढ़ता है, तो उसे पहनना कम करना उचित हो सकता है।
कितनी बार योग करें?
शुरुआत में सप्ताह में 4–5 दिन हल्की योग दिनचर्या की जा सकती है। यदि शरीर आराम से इसे स्वीकार करता है तो कुछ हल्के स्ट्रेच रोजाना भी किए जा सकते हैं।
एक साथ बहुत लंबा अभ्यास करने के बजाय नियमित और नियंत्रित अभ्यास अधिक व्यावहारिक है। स्ट्रेचिंग करते समय उछलना नहीं चाहिए और हर स्ट्रेच को धीरे-धीरे करना चाहिए।
कब योग करना बंद कर देना चाहिए?
यदि अभ्यास के दौरान:
- तेज या चुभने वाला दर्द हो,
- एड़ी का दर्द अचानक बढ़ जाए,
- पैर में सूजन दिखाई दे,
- सुन्नपन या झुनझुनी हो,
- चलने में परेशानी होने लगे,
- या अभ्यास के बाद दर्द काफी देर तक बढ़ा रहे,
तो योग रोककर विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
यदि एड़ी का दर्द लगातार बना रहता है या सामान्य गतिविधियों में परेशानी पैदा करता है, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से जांच करवाना उचित है। विशेष रूप से अचानक चोट के बाद तेज दर्द, पैर पर वजन रखने में कठिनाई, महत्वपूर्ण सूजन या लगातार बिगड़ते लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
योग को उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि उचित चिकित्सकीय देखभाल के साथ एक सहायक गतिविधि के रूप में देखना बेहतर है।
निष्कर्ष
प्लांटर फैसियाइटिस में पैरों, पिंडलियों और टखनों की नियमित एवं हल्की स्ट्रेचिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ताड़ासन, अधोमुख श्वानासन, उत्तानासन, वीरभद्रासन I, उत्कटासन, दंडासन स्ट्रेच, पैर की उंगलियों का स्ट्रेच, बद्ध कोणासन, वृक्षासन और विपरीत करणी को अपनी क्षमता और दर्द के स्तर के अनुसार योग दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात है कि किसी भी आसन को दर्द बढ़ाकर न करें। धीरे-धीरे अभ्यास करें, पैरों को पर्याप्त आराम दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें। नियमित स्ट्रेचिंग, उचित गतिविधि और पैरों को पर्याप्त सपोर्ट देने वाली दिनचर्या प्लांटर फैसियाइटिस के प्रबंधन में सहायक हो सकती है।







