उत्तान पद्मासन कैसे करें? विधि, लाभ और सावधानियां
उत्तान पद्मासन एक उन्नत योगासन है, जिसमें शरीर को स्थिर रखते हुए पैरों और धड़ को ऊपर उठाने का अभ्यास किया जाता है। यह आसन पेट, पैरों, कूल्हों और हाथों की मांसपेशियों पर काम करता है तथा शरीर के संतुलन और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसे करने के लिए शरीर में पर्याप्त लचीलापन, कोर शक्ति और संतुलन होना आवश्यक है।
शुरुआती साधकों को इस आसन का अभ्यास किसी आसान तैयारी वाले आसन से शुरू करना चाहिए और शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए।
उत्तान पद्मासन क्या है?
‘उत्तान’ का अर्थ है ऊपर उठाया हुआ या विस्तारित और ‘पद्मासन’ का अर्थ है कमल की मुद्रा। उत्तान पद्मासन में पद्मासन की स्थिति बनाकर शरीर को नियंत्रित तरीके से ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है। यह सामान्य पद्मासन की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण अभ्यास माना जाता है।
इस आसन में पैरों की स्थिति बनाए रखते हुए हाथों की सहायता से शरीर को ऊपर उठाया जाता है। इसलिए हाथों, कंधों, पेट और पीठ की शक्ति महत्वपूर्ण होती है।
उत्तान पद्मासन करने से पहले तैयारी
इस आसन को सीधे करने के बजाय कुछ तैयारी वाले अभ्यास करना उपयोगी हो सकता है। जैसे:
- पद्मासन का नियमित अभ्यास
- अर्ध पद्मासन
- सुखासन
- भुजंगासन
- फलकासन
- नौकासन
- दंडासन
- कलाई और कंधों के हल्के स्ट्रेचिंग अभ्यास
यदि पद्मासन में घुटनों या कूल्हों में खिंचाव महसूस होता है, तो पहले लचीलेपन पर काम करें।
उत्तान पद्मासन कैसे करें?
1. प्रारंभिक स्थिति बनाएं
समतल और आरामदायक स्थान पर योग मैट बिछाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा रखें और रीढ़ को सीधा रखें।
2. पद्मासन बनाएं
दाएं पैर को मोड़कर बाएं जांघ के ऊपर रखें। इसके बाद बाएं पैर को मोड़कर दाएं जांघ के ऊपर रखें। दोनों घुटनों को जमीन की ओर आराम से रहने दें।
यदि पूर्ण पद्मासन सहज न हो, तो जबरदस्ती पैर को जांघ के ऊपर न रखें।
3. हाथों की स्थिति रखें
दोनों हथेलियों को शरीर के पास जमीन पर रखें। उंगलियां आगे की ओर या ऐसी दिशा में रखें जिसमें कलाई आरामदायक महसूस हो।
हथेलियों को जमीन पर मजबूती से टिकाएं और कंधों को कानों से दूर रखें।
4. शरीर को ऊपर उठाएं
गहरी सांस लें और पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करते हुए हथेलियों से जमीन को दबाएं। धीरे-धीरे शरीर के वजन को हाथों पर स्थानांतरित करें और कूल्हों को जमीन से ऊपर उठाने का प्रयास करें।
पैरों की क्रॉस की हुई स्थिति को बनाए रखें।
5. शरीर को स्थिर रखें
यदि आप शरीर को ऊपर उठा पाते हैं, तो कुछ क्षणों तक संतुलन बनाए रखें। गर्दन को सामान्य स्थिति में रखें और सामने एक स्थिर बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें।
सांस को रोकने के बजाय धीरे-धीरे और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
6. वापस आएं
नियंत्रित तरीके से सांस छोड़ते हुए शरीर को धीरे-धीरे जमीन पर वापस रखें। पद्मासन को खोलें और दोनों पैरों को आराम दें।
कुछ सामान्य सांसों के बाद आराम करें।
उत्तान पद्मासन में सांस लेने का तरीका
सांस इस आसन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- प्रारंभिक स्थिति में सामान्य सांस लें।
- शरीर उठाते समय धीरे-धीरे सांस लें।
- मुद्रा में रहते हुए सहज और नियंत्रित सांस लेते रहें।
- वापस नीचे आते समय धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
- सांस को लंबे समय तक रोकने से बचें।
उत्तान पद्मासन कितनी देर करें?
शुरुआती साधक शरीर को केवल कुछ सेकंड के लिए ऊपर उठाने का प्रयास कर सकते हैं। अभ्यास बढ़ने पर समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
इस आसन में समय से अधिक महत्वपूर्ण सही तकनीक और शरीर पर नियंत्रण है। यदि संतुलन बिगड़ रहा हो या कलाई, कंधे, घुटने या कूल्हे में दर्द हो, तो अभ्यास रोक दें।
उत्तान पद्मासन के संभावित लाभ
नियमित और सही अभ्यास से उत्तान पद्मासन के कई शारीरिक और मानसिक लाभ हो सकते हैं।
1. कोर मांसपेशियों को सक्रिय करता है
शरीर को जमीन से ऊपर उठाने के लिए पेट और कोर की मांसपेशियों को सक्रिय करना पड़ता है। इससे कोर की शक्ति और नियंत्रण पर काम होता है।
2. हाथों और कंधों को मजबूत बनाने में मदद
इस आसन में शरीर का भार हाथों पर आता है। इसलिए हथेलियों, कलाई, भुजाओं और कंधों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं।
3. शरीर के संतुलन में सुधार
उत्तान पद्मासन में शरीर को कुछ समय तक स्थिर रखना पड़ता है। नियमित अभ्यास संतुलन और शरीर की जागरूकता को विकसित करने में मदद कर सकता है।
4. एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
इस मुद्रा में संतुलन बनाए रखने के लिए ध्यान को एक बिंदु पर केंद्रित करना पड़ता है। इससे मानसिक एकाग्रता का अभ्यास होता है।
5. पैरों और कूल्हों पर काम करता है
पद्मासन की स्थिति के कारण कूल्हों और पैरों में लचीलेपन की आवश्यकता होती है। नियमित योग अभ्यास के साथ यह क्षेत्र सक्रिय और गतिशील बनाए रखने में मदद कर सकता है।
6. शरीर पर नियंत्रण बढ़ाता है
उत्तान पद्मासन केवल ताकत का नहीं बल्कि नियंत्रण और समन्वय का भी अभ्यास है। हाथ, पेट, पैर और धड़ को एक साथ नियंत्रित करना पड़ता है।
7. मानसिक स्थिरता का अभ्यास
संतुलन वाले योगासन में जल्दबाजी करने के बजाय शांत रहना आवश्यक होता है। इसलिए यह आसन शरीर के साथ-साथ मानसिक स्थिरता के अभ्यास में भी उपयोगी हो सकता है।
उत्तान पद्मासन करते समय सामान्य गलतियां
1. बिना तैयारी के आसन करना
सीधे उन्नत मुद्रा में जाने से चोट का जोखिम बढ़ सकता है। पहले पद्मासन और हाथों की ताकत वाले अभ्यास करें।
2. पैरों को जबरदस्ती मोड़ना
पद्मासन में घुटनों को जबरदस्ती जमीन की ओर दबाना सही नहीं है। इससे घुटनों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
3. कंधों को कानों की ओर उठाना
शरीर को ऊपर उठाते समय कंधों को कानों की ओर खींचने के बजाय उन्हें नियंत्रित और स्थिर रखें।
4. शरीर को झटके से उठाना
शरीर को अचानक ऊपर उठाने से कलाई और कंधों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हमेशा नियंत्रित गति अपनाएं।
5. सांस रोकना
कठिन मुद्रा में कई लोग अनजाने में सांस रोक लेते हैं। ऐसा न करें। सांस सहज और नियमित रखें।
6. दर्द को नजरअंदाज करना
मांसपेशियों में सामान्य खिंचाव और तेज दर्द अलग-अलग होते हैं। तेज या असामान्य दर्द होने पर तुरंत आसन से बाहर आएं।
शुरुआती लोगों के लिए उत्तान पद्मासन के आसान विकल्प
यदि पूरा उत्तान पद्मासन कठिन लगता है, तो निम्न अभ्यासों से शुरुआत कर सकते हैं:
- सुखासन में बैठकर हाथों पर हल्का भार डालना
- दंडासन में कोर सक्रिय करना
- पद्मासन का अभ्यास
- अर्ध पद्मासन का अभ्यास
- फलकासन से हाथों और कंधों की शक्ति बढ़ाना
- लोलासन की तैयारी करना
- योग ब्लॉक की सहायता से शरीर को हल्का उठाने का अभ्यास करना
योग ब्लॉक का इस्तेमाल करते समय भी शरीर को झटके से ऊपर न उठाएं।
उत्तान पद्मासन में सावधानियां
इस आसन का अभ्यास करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें:
- घुटने में दर्द होने पर पद्मासन की स्थिति न बनाएं।
- कूल्हों में पर्याप्त लचीलापन न होने पर पैरों को जबरदस्ती न मोड़ें।
- कलाई, कोहनी या कंधे की समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
- हाल की चोट या सर्जरी के बाद बिना मार्गदर्शन के यह आसन न करें।
- गर्भावस्था के दौरान इस प्रकार के उन्नत संतुलन वाले आसन से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
- चक्कर या असहजता महसूस होने पर तुरंत अभ्यास रोक दें।
- शरीर की क्षमता से अधिक देर तक मुद्रा में न रहें।
उत्तान पद्मासन का अभ्यास कब करें?
योगासन का अभ्यास सामान्यतः खाली या हल्के पेट किया जाता है। भोजन के तुरंत बाद इस आसन को करने से बचें। सुबह का समय या भोजन के कई घंटे बाद का समय अभ्यास के लिए सुविधाजनक हो सकता है।
अभ्यास से पहले हल्का वार्म-अप और कलाई, कंधे, कूल्हे तथा पैरों की तैयारी करना उपयोगी रहता है।
उत्तान पद्मासन के बाद कौन से आसन करें?
उन्नत मुद्रा के बाद शरीर को आराम देने के लिए कुछ सरल अभ्यास किए जा सकते हैं, जैसे:
- दंडासन
- सुखासन
- बालासन
- पश्चिमोत्तानासन का हल्का अभ्यास
- कलाई और कंधों को आराम देने वाले हल्के स्ट्रेच
अभ्यास के अंत में कुछ समय शांत बैठना भी अच्छा रहता है।
उत्तान पद्मासन और पद्मासन में अंतर
पद्मासन मुख्य रूप से बैठने की ध्यानात्मक मुद्रा है, जिसमें दोनों पैरों को विपरीत जांघों पर रखा जाता है। उत्तान पद्मासन में इसी प्रकार की पैर स्थिति के साथ शरीर को हाथों की सहायता से ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है।
इस कारण उत्तान पद्मासन में हाथों, कंधों और कोर पर अतिरिक्त भार आता है तथा अधिक ताकत और संतुलन की आवश्यकता होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या शुरुआती व्यक्ति उत्तान पद्मासन कर सकता है?
शुरुआती व्यक्ति तुरंत पूर्ण मुद्रा करने के बजाय इसकी तैयारी वाले अभ्यास कर सकता है। पहले पद्मासन, कलाई की ताकत, कोर और संतुलन पर काम करना बेहतर है।
क्या उत्तान पद्मासन से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं?
इस मुद्रा में शरीर को ऊपर उठाने के लिए कोर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। नियमित अभ्यास से कोर की ताकत और नियंत्रण पर काम किया जा सकता है।
उत्तान पद्मासन कितनी देर करना चाहिए?
शुरुआत में कुछ सेकंड पर्याप्त हो सकते हैं। जैसे-जैसे ताकत और संतुलन बढ़े, समय धीरे-धीरे बढ़ाएं। मुद्रा की गुणवत्ता को अवधि से अधिक महत्व दें।
क्या उत्तान पद्मासन वजन कम करने के लिए किया जा सकता है?
यह एक उन्नत योग मुद्रा है जो मांसपेशियों और शरीर के नियंत्रण पर काम करती है। वजन प्रबंधन के लिए इसे संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ समग्र अभ्यास का हिस्सा माना जाना चाहिए।
क्या उत्तान पद्मासन रोज किया जा सकता है?
यदि शरीर में पर्याप्त ताकत और लचीलापन है तथा अभ्यास के दौरान कोई दर्द नहीं होता, तो इसे नियमित योग अभ्यास में शामिल किया जा सकता है। शुरुआती लोगों को धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाना चाहिए।
निष्कर्ष
उत्तान पद्मासन एक चुनौतीपूर्ण योगासन है, जिसमें पद्मासन की स्थिति के साथ शरीर को हाथों की सहायता से ऊपर उठाया जाता है। यह कोर, हाथों, कंधों, संतुलन और शरीर के नियंत्रण पर काम करने वाला अभ्यास है। इसे सही तकनीक, पर्याप्त तैयारी और धैर्य के साथ करना महत्वपूर्ण है।
यदि पद्मासन में घुटने या कूल्हे सहज नहीं हैं या शरीर को हाथों पर उठाना कठिन लगता है, तो पहले सरल तैयारी वाले अभ्यास करें। योग में शरीर को जबरदस्ती मुद्रा में लाने के बजाय धीरे-धीरे क्षमता विकसित करना अधिक महत्वपूर्ण है।







